कोरबा जिले के घुमानीडांड आसपास माइक्रो फाइनेंस कंपनी और प्राइवेट बैंकों के दलालों ने साग सब्जी के नाम पर गरीब धनुहार आदिवासी महिलाओं का समूह के नाम पर किया करोड़ों रूपये का धोखाधड़ी, एक महिला की मृत पति के बदले दूसरे युवक बबलू को बताया पति, दलालों और प्रायवेट माइक्रो फाइनेंस और बैंक प्रबंधको के साठगांठ से निकाला पैसा, अब पैसा की वसूली से मचा हड़कंप, गोंडवाना उठाएगी सदन में मामला।।

   विशेष संवाददाता गोंडवाना उदय न्यूज ग्रुप कोरबा

कोरबा,छत्तीसगढ़, 27 जून 2024,  गोंडवाना उदय न्यूज,

कुछ भी कहें, आज आदिवासी इलाकों में भोले भाले गरीब आदिवासी समुदाय के लोगों को उनकी अज्ञानता और निरक्षरता को भांप कर चतुर चालकों द्वारा लूटना एक नियति बन गया है।

इन दिनों ऐसी ही घटना कोरबा जिले के उतरी हल्का के पसान एवं पोंडी उपरोड़ा तहसील के सैकड़ों गांवों के कुल मिलाकर विशेष पिछड़ी आदिवासी जनजाति धनुहार जाति के महिला वर्गों के भोले भाले गरीब जो कम पढ़े लिखे केवल हस्ताक्षर ले देके करते हैं, यहां तक जो लिखना नहीं जानते उनके नाम पर साग सब्जी लगाने के नाम पर प्राइवेट बैंक एवं माइक्रो फाइनेंस कंपनी सांठ गांठ कर दलालों के माध्यम से करोड़ों रुपए की धोखाधडी की मामला प्रकाश में आते ही हड़कंप मच गया है। जानकारी हो कि ग्राम पंचायत घुमानीडांड के धनुहार पारा मोहल्ला निवासी सुमित्रा पति शनिचराम ने बताया कि मुझे जटगा के पंजाब पिता धनराज, पंकज पिता धनराज संतोष उर्फ बबलू और सेटिंग बैंक कटघोरा के प्रीति मैडम, इस्पंना स्फूर्ति फाइनेंस गुरसिया के राज सर, सतेंद्र कौशिक सहित कई अन्य लोग थे नाम नहीं जानते हमारे गांव में आते थे, और कहते थे कि तुम लोग गरीब हो, साग सब्जी लगाओ हम पैसा दिलवाएंगे, और जटगा मे पंजाबसिंह नाम के व्यक्ति के घर बुला कर फार्म जमा करवाये। और मुझे सेटिंग बैंक कटघोरा से 45000 रूपये, बी एस एस बैंक से 40000 रूपये, नईंफीस बैंक से 30000 रूपये और सहायता बैंक से 30000 रूपये खड़ा करके अकेले मुझसे  निकलवाये। और मुझे सिर्फ हजार – पांच सौ रूपये देते थे बाकी सब पैसा को यह कहके ले लेते थे की कर्ज हम पटाएंगे, पैसा हमें दे दो, और  हरेक पैसा निकासी के समय चार बार भूति मजदूरी के नाम पर कुल मुझे मात्र 3000 रूपये अलग अलग निकासी के समय दिया गया है। उसी प्रकार सीमा बाई पति दलराम धनुहार, बैंक आफ बड़ौदा खाता 49699100024480 जिससे पांच अलग अलग बैंक एवं माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 30 हजार,30000 हजार,40000 हजार,40000 हजार फिर 45000 हजार रुपये की निकासी कराया गया है जिसे सिर्फ निकासी के समय अलग अलग कुल पांच हजार रूपये ही दिया गया है। जिनके पास पास बुक के आलावा कोई कागजात नहीं है। इसी प्रकार प्रमिला पति बोधराम धनुहार 17 /1/2021 को बैंक ऑफ बड़ौदा खाता न 49690100024482 जिससे भी कई अन्य से करीब लाखों रुपए दिलवाया गया है। भूती उनके ही शब्दों में 2000 रूपये के अलावा कुछ नहीं मिला है। जयकुंवर पति बसंत धनुहार, सुमारिया पिता सोमारूराम, रामकुंवर पति बलराम जो अंगूठा लगाती है जिसे दूसरे से हस्ताक्षर करवाया गया है। जिसके नाम पर कई बार राशि निकवाये जानकारी बताया गया है। नर्बदा पति बलराम धनुहार ताराकला पति त्रिभुवन धनुहार, जयमतिया पति जयमंगल, धनुहार, सरोजनी पति समयराम जो अंगूठा छाप को दूसरे का हस्ताक्षर कर वाया गया है। सुमारिया पति सुनाराम धनुहार एसबीआई खाता 42549 938767,सीताबाई पति दयाराम धनुहार ग्राम लेपरा निवासी से पांच बैंको से राशि निकलवाया गया है, 45000 रूपये सेटिंग बैंक, इस्पना से 40000 रूपये सत्या माइक्रो से 40000रूपये, नावार्ड बैंक से 40000 रूपये, बी एस एस बैंक से 40000 रूपये कुल मिलाकर 2 लाख रुपए से अधिक एक गरीब आदिवासी महिला से कर्ज के रुप में राशि दिलवाया कर हड़प लिया गया। अमूमन आज जिनके घर दो पहर खाने का ठिकाना तक नहीं है। इस प्रकार से सैकड़ों गरीब आदिवासी महिला समूह के सदस्य हैं जिनसे प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनी और बैंक तथा दलालों ने मिलकर इनके साथ खयानत कर धोधाधड़ी करने का मामला उजागर हुआ है।

जानकारी की मानें तो,गोंडवाना उदय न्यूज ग्रुप के चीफ डॉ एल एस उदय जो आज कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा तहसील के ग्राम घुमानीडांड में अपनी न्यूज टीम के साथ पहुंचे थे। विशेषकर जिले के अत्यंत गरीब और पिछड़े अधिकांशत: महिला आदिवासी निरक्षर धनुहार जाति के गरीब लोगों से प्राईवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनी समूह बना कर साग सब्जी लगाने के नाम पर स्थानीय दलालों द्वारा विभिन्न प्रायवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधको से सांठ गांठ कर भोले भाले आदिवासी महिलाओं को जिनका बैंक में खाता खोलवा कर लाखों रुपये निकाल कर ख्यानत करने की जानकारी मिलने पर गोंडवाना उदय न्यूज के चीफ डॉ उदय सिंह ने ग्राम घुमानीडांड पीड़ित महि लाओ से किया बातचीत। और उनके हालात को जाना,

जिनका कहना था कि कोरबा जिले में संचालित प्रायवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनी और प्रायवेट आईडीएफसी बैंक तथा इंडियन बैंक, स्पंदना फाइनेंश लिमिटेड , सेटिंग बैंक, बी एस एस, नाइफिस, सहायता बैंक जैसे माइक्रो फाइनेंस कंपनी के प्रबंधको द्वारा भोले भाले आदिवासी महिलाओं को बैंक के दहलीज में खड़ा कर राशि निकलवाए जानें का गंभीर मामला है। वहीं दलालों द्वारा महिला समूह के सदस्यों को बैंक से पैसा निकालते ही आपके पैसे को हम पटाएंगे कहके उनके हाथों से रकम ले लेते थे। महिलाओं उनके ही शब्दों में एक दिन का भूति मजदूरी केवल हजार, पांच सौ 500 रूपये दलालों द्वारा थमा दिया जाता था। तथा समूह के महिलाओं को कहते थे की साग सब्जी हम लगाएंगे और तुम्हारा कर्जा को हम पटा देंगे। लेकिन अभी तक न तो बैंक से कोई राशि मिला। न ही हमारा लोन का राशि ही दलालों ने पटाया। यहां तक एक एक महिलाओं के नाम पर 5 – 5 प्राइवेट बैंक एवं माइक्रो फाइनेंस से लाखों रूपये का लोन इन महिलाओं के नाम पर सिर में लाद दिया गया है। किसका फायदा फाइनेंस दलालों सहित माइक्रो फाइनेंस कंपनी और बैंक प्रबंधको की मिली भगत से इन गरीब महिलाओं के नाम पर बैंक से राशि आहरण कर करोड़ों रुपये की घोटाला होने की जानकारी मिली है।

इस विषय में हितग्राहियों का यह भी कहना है, कि दलालों और प्रायवेट माइक्रो फाइनेंस एवं बैंक के अधिकारियों ने मिलकर ऐसा खेल खेला है , कि पैसे न मिलने पर गरीब आदिवासी महिला समूह के आदिवासी गरीब महिला न्याय की आस में हैं। यहां तक भूख व गरीबी से जूझते हुए आदिवासी महिलाओं के साथ ऐसा खेल खेला गया है, कि एक महिला सदस्य की पति का मृत्यु हो जानें पर दूसरे आदमी का फोटो चस्पा कर पैसा निकालने की गंभीर मुद्दा सामने आया है। बहरहाल साग सब्जी के नाम पर प्रायवेट माइक्रो कंपनी बिना पैसा तो दिया लेकिन कंपनी एवं दलालों के बीच पैसा छीना झपटी कर लिया गया है। अब माइक्रो कंपनी के नये लोगों द्वारा दादागिरी के साथ महिलाओं से पैसों की वसूली किया जा रहा है।

अमूमन प्रायवेट माइक्रो फाइनेंस द्वारा वसूली के नाम पर लगातार महिलाओं को मानसिक प्रताड़ना भी करने की जानकारी मिला है। जिनसे डर के मारे सैकड़ों गरीब आदिवासी महिला घर छोड़ कर बाहर चले गए हैं। कुछ पीड़ित महिलाओ का कहना था,कि कंपनी के वसूली कर्ताओ के धमकी के डर से हम घर से बाहर भाग गए थे। यहां तक तेंदू पत्ता भी हम इस वर्ष नहीं तोड़ पाये, वहींं गांव के सोसाइटी में चावल लेने जाते हैं,तो उनके डर से की हमें देख न लें करके चेहरा को कपड़े से बांध कर जाते हैं।इस धोधाधडी की घटना इन गरीब तबकों के लिए एक गंभीर मुद्दा है। अमूमन इन आदिवासी महिला समूह के नाम पर हुई करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की जांच जरूरी है। जिससे इन गरीब आदिवासी महिलाओं को न्याय मिल सके।

इस मुद्दे को लेकर गोंडवाना उदय न्यूज के चीफ एडिटर डॉ एल एस उदय सिंह ने स्थानीय विधायक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर सिंह मरकाम से एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा है, कि प्राईवेट माइक्रो फाइनेंस और बैंक तथा दलालों के बीच गरीब धनुहार जाति के भोले भाले आदिवासी महिलाओं को चिन्हित कर इनके साथ जितने भी जिम्मेदार बैंक कर्मी, माइक्रो फाइनेंस कंपनी के लोग हैं तथा दलालों के उपर ऊंच स्तरीय जांच करवाने तथा तथा पीड़ित आदिवासी महिलाओ के उपर कर्ज की अधिभार है मुक्त किया जाए। तथा विधान सभा सदन में मामला को उठा दोषियों के ऊपर कठोर सजा दिलाई जावे, ताकि दुबारा घटना न हो।