बस्तर नरसंहार की आग जिस तेजी से धधक रही है। जिसकी चिंगारी फिलहाल देश के सभी आदिवासियो समुदाय को झुलसा दी है। बहरहाल इस नरसंहार को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी व कई सामाजिक संगठनों ने प्रदेश के मुखिया का पुतला दहन कर जिस प्रकार से छिछा लेदर किया गया है । बाबजूद भी सरकार निर्दोष आदिवासियो की दर्दनाक मौत पर ठीक से मुंह नहीं खोला। वहीं आदिवासी नेताओ के मुंह में लगे मास्क के कारण आवाज तक नहीं निकल सका। इस घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज व ए पी आई के युवा नेता वी पी पी पोया ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि मानव रक्षा एवं बस्तर में स्थाई शांति की स्थापना के लिए समाज के लोग अपने अपने घरों पर धरना प्रदर्शन भी किये । जैसा भी हो आजादी के बाद छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की स्थिति कमोवेश कमजोर होते जा रही है। बीते दिनों 17 मई 2021 को बीजापुर सुकमा जिले के सीमावर्ती ग्राम सिलगेर मैं खोले जा रहे हैं पुलिस के अंग का विरोध ग्रामीण जनों द्वारा किया था जिसमें पुलिस फोर्स के द्वारा बंदूक फायरिंग की गई। 3 आदिवासी की मौत हो गया। और 18 से 20 लोग घायल हो हुये। कई लापता हुए हैं। यह घटना स्थानीय समाचार और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश में इसका विरोध किया गया जिसका भूपेश बघेल सरकार द्वारा एक भी स्टेटमेंट नहीं आया। ऐसी घटना पूर्व की डॉक्टर रमन सिंह की सरकार में आदिवासियों के घर उजाड़े गए जलाए गए। और फर्जी नक्सली के नाम पर बस्तर के लोगो को मारा भी गया। पुनः अब भूपेश बघेल की सरकार में यह घटना या साजिश चल रहा है। जिसमें आदिवासी मूल वासियों को फर्जी नक्सली बताकर उनके अधिकारों से वंचित करना चाहती है। स्थाानीय कुछ जन प्रतिनिधियों का कहना है। इस प्रकार की घटना होती है तो आदिवासी समाज और पूरा छत्तीसगढ़ के लोकतंत्र व मानवता के लिए अनिश्चितकालीन धरना संविधानिक आंदोलन करेंगे । सरकार जो लोग मरे हैं उन्हें 50 लाख रूपए प्रदान करें।और घायल लोगों को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराएं और उनके परिवार जनों को एक एक नौकरी दे ,सरकार अनुसूचित क्षेत्रों के पांचवी अनुसूची, पेसा कानून , ग्राम सभा , एवं तमाम कानूनों को जमीनी स्तर पर लागू करें । सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ द्वारा आदिवासी समुदाय के जल जंगल जमीन व संस्कृति संवैधानिक अधिकारों के रक्षा की रक्षा हो।