सूत्रों की मानें तो प्रदेश के बस्तर हल्को में दशकों से गुर्रिला युद्ध चल रहा है।जिसमें सबसे ज्यादा इन हल्को नरसंहार आदिवासियो के उपर होने की घटना पर कई सामाजिक संगठन व राजनैतिक दल अब सरकार के विरोध में आ गए हैं। यहां तक बीते 17 मई को बीजापुर और सुकमा के सरहदी जमीर पर सरकार की नए फोर्स कैम्प निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन के बीच हुई तनातनी हो गई। लिहाजा आखिरकार पुलिस की ओर से निहथे गरीब आदिवासियो के उपर आश्रू गैस तथा गोलीबारी जैसे घटना सार्वजनिक हो गया है। अमूमन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ओर से पूर्व निर्धारित तिथी के मुताबिक आज मध्यप्रदेश,उतरप्रदेश छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों के आदिवासी बाहुल्य इलाको में जगह जगह छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ कोविड 19 के पालन करते हुए पुतले फूंका। तथा पार्टी की ओर से सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के मूलवासियो के साथ हो रहे अन्याय अत्याचार की कड़ी निंदा की। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ एल एस उदय ने कहा है कि आजादी के बाद से हमनें यह नहीं सोंच पाया कि सत्ता को हम दूसरे के हाथों सौपते रहे हैं। जो आदिवासी समुदाय की सबसे बड़ी चूक थी। उन्होनें कहा कि आखिरकार इस देश में क्या हो रहा है? सबसे बड़ी दु:ख इस बात की है। देश राज्यों में कांग्रेस भाजपा अपना हितकारी मानते हुए, विधानमंडल में आदिवासी बहुसंख्यक समुदाय की ओर से जो अपना प्रतिनिधि विधायक चुनकर देते रहे हैं। जो आज लगता है कि समुदाय का सबसे बड़ी चूक है।शंसय नहीं स्पष्ट है, कि जिनविधायकों को मूलवासी अपना बेटा समझते थे, जिनका कार्य उन दोनो पार्टी के एजेंट जैसे कृत्य दिखता है। जिससे आदिवासी समुदाय के लोग दु:खी होने के आलावा और क्या कर सकते हैं। जो समाज विरोधी पार्टी के टिकटो तथा पूंजीपतियों के पैसों से चुनाव जीतते हैं। आज दुर्भाग्य है कि समाज के बारे में वे कभी नहीं सोंचते। आज बस्तर के अविभाजित जिलों में चाहे नक्सली हिंसा हो,चाहे पुलिस दमन हो,निर्दोष आदिवासी ही मारे जा रहे हैं। ऐसे विषम परिस्थितियों में प्रदेश के जिम्मेदार क्षेत्रीय विधायक भी आज गुंगे बनते जा रहे हैं।आज पूरे देश प्रदेश के सभी आदिवासी समुदायों की हरेक तथ्यों को सरकार द्वारा पेंचदार बनाने जैसे हर असलियत को अब समझने की जरूरत है। नतीजतन बस्तर में आये दिन लगातार हो रहे निर्दोष आदिवासी जिनका नरसंहार में हुई मौत को लेकर अपने परिवार की दर्द को सीने में दबाकर आज राख की ढेर में खोज रहे हैं। आज बिलखते परिवार किसी ने अपना मां बाप खोया, किसी ने अपने बेटा खोया, तो किसी ने अपने पति खोया। तो किसी ने पत्नी से अलग हो गये। इतनी बड़ी दर्दनाक दास्तान को आखिर इसे रोकेगा कौन? आज सबसे बड़ी प्रश्न चिन्ह है।जिसका जिम्मेदार कौन होगा? आज यही सवाल सबको कौंध रहा है। आज सारे मूलवासियों को एक विचारधारा में लौटना होगा, तथा समाधान का रास्ता ढूढना होगा। ऐसी स्थिति में पार्टी महासचिव डॉ उदय ने कहा कि आजादी 74 वर्ष गुजारने के बाद, अब हम सब मूलवासियों को किसी से टकराव नहीं, बल्कि एक होकर अपने सवैंधानिक हक्क की लडाई लड़ना होगा।