सूरजपुर, छत्तीसगढ़ (GCG NEWS)4 अप्रैल 2021 प्रदेश का दंडकारण्य हल्का कहलाने वाले इलाके में बामपन्थी हथियारबंध लडाई में मारे गये शहीद सुरक्षा कर्मियों के प्रति ए पी आई के प्रदेश सचिव बीपीएस पोया ने वर्तमान बीजापुर सुकमा नारायणपुर बॉर्डर पर हुए इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि- कांग्रेस सरकार के पास छत्तीसगढ़ वासियों को सुरक्षा देने के लिए एक भी विशेष नीति नहीं है। जो छत्तीसगढ़ वासियों को सुरक्षित कर सकें । पोया ने बताया कि मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कांग्रेस की सरकार आई। उसके बाद से लगातार 15 वर्षों तक बीजेपी सरकार ने राज किया ।और 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में नक्सली समस्या का समाधान करने का वादा किया था । पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाने के बाद भी अपने वादे नही निभा पा रही है। लगातार छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले होते आ रहे हैं और सैकड़ों जानें जा रही है। पुलिस को मेडल मिला और नक्सली जो सेरेंडर किये बदौलत उन्हे मैडल और सहायता राशि प्राप्त हुई। सरकार नक्सली हमला क्यों होता है? इसका कारण कभी जानने का प्रयास नहीं किये। नक्सली हमले कौन-कौन से क्षेत्र में होती है,नक्सली हमला क्यों होती है ? नक्सलियों का क्या है लक्ष्य है ? नक्सलियों को संचालन करने के पीछे किसका हाथ होती है ? सरकार प्रशासन इस दिशा में एक्शन करने पर चुप्पी क्यों ? तमाम ऐसे सवाल हैं जो नागरिकों के मन मे आज जो वैज्ञानिक सवाल उठते रहे हैं।इसका हम जवाब सरकार से पूछना चाहता हैं ।अभी तक देखा गया है कि जिन क्षेत्रों में खनिज संपदा ,वन संपदा ,जलसंपदा से परिपूर्ण है वह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है।जहां लगभग 90 प्रतिशत आदिवासी मूलनिवासी पिछड़ी जनजाति के लोग निवासरत हैं जो अपने जल जंगल जमीन और संस्कृति को बचाने ,प्रकृति संतुलन को बनाए रखने,जीवन यापन कर रहे।उन लोगों को स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार नहीं । सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में बहुत सारे स्पेशल पुलिस फोर्स बटालियन लगाकर नागरिकों को डराया जाता है । उनके साथ बलात्कार, टॉर्चर , फर्जी नक्सली कर उन्हें एकाउंटर भी कर दिया जाता है। सरकार यहां के लोगों को शैक्षणिक सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक रूप से कमजोर करना चाहती है। जिससे वे अपने हक अधिकार की लड़ाई आंदोलन ना लड़ सकें। हमने सरकार की जो रिपोर्ट देखी है,उसमें अधिकांश पुलिस सुरक्षा बल वाले भी आदिवासी मूलनिवासी हैं। और मारे जाने वाले नक्सली भी आदिवासी है। जब भी नक्सली हमला या पुलिस एक्शन लेती है तो जाने सिर्फ सिर्फ छत्तीसगढ़ के आदिवासी मूल निवासी ,युवाओं की जान जाती है। इसलिए हम कहते हैं कि जान पुलिस (सुरक्षा बलों) , नक्सलियों की या आम नागरिक की हो जान तो जान होती है।सबको प्रकृति में जीने का अधिकार है , सरकार इस पर स्पेशल टीम गठित करें, और नक्सली जैसे बड़ी समस्या पर समाधान निकालें। समाधान निकालने का 5 बड़े उपाय है जिसे सरकार को अपनाना होगा ।
आपस में एक दूसरे से बात करना होगा । नक्सली हमला को लेकर स्पेशल कानून बनाना होगा । अनुसूचित क्षेत्र वासियों को उनके जल जंगल जमीन का मालिकाना हक देना होगा ,आदिवासियों के जमीन में अगर माइनिंग होता है तो शेयर होल्डर बनाना होगा, प्रभावित क्षेत्र के डेवलपमेंट के लिए विकास कार्य करने होंगे क्षेत्र में शिक्षा को लेकर बड़ी जनजागृति करने की जरूरत है। सरकार को पहल करनी होगी और निर्णायक कदम उठाकर छत्तीसगढ़ में रहने वाले अंतिम छोर के गांवो ,जंगलों पहाड़ों तक रहने वाले लोगों का संपूर्ण विकास करना होगा । सरकार इन समस्या को जल्द से जल्द समाधान करें जल जंगल जमीन और संस्कृति की संविधान के मुताबिक हो।