उमारिया जिले में 14 वीं सदी पूर्व का तात्कालीन गोंड राजवंश का ऐतिहासिक भव्यगढ़ी

(एम एस टेकाम द्वारा संकलित)उमारिया मध्यप्रदेश (GCG NEWS) मध्य भारत के इतिहास में  ईश्वी सन 1480 के करीब देश में गढ़ा मंडला के अधीन गोंडवाना का वैभवशाली साम्राज्य 52 गढ़ 57 परगना राज्य स्थापित था। जिस कालखंड में गोंडवाना साम्राज्य देश में धूमकेतू जैसे चमक उठा था।जिस समय भारत का एक कोना दब चुका था। राजा संग्रामशाह  कई युद्धों में विजयी होते रहे कभी हारे नहीं। इसी कालखंड में  महाराजा संग्रामशाह के राज्य विस्तार के दौरान एक गढी जो मध्य प्रदेश के कटनी जिला में गोंड राजाओं द्वारा ऐतिहासिक गढी़ भीतरी गढी़ है। जिसे भीतरी गढ़ के नाम से जाना जाता है। यह की कोडोपा राजवंश जी का किला भी कहा जाता है ।इस किले का निर्माण गोंड राजा कोडोपा द्वारा 14वी सदी पूर्व  करवाया जाना प्रतीत होता है। भीतरी गढ़ के बाजू में भितरी नदी प्रवाहित होती है। जिसमें अथाह जल राशि की आपूर्ति रही होगी ।यह की गढी़महाराजा संग्राम शाह के बामन गढ़ के अधीन रही होगी जो कि बेहद भव्य आकर्षक एवं शानदार रही होगी कैमूर पर्वत श्रृंखला के बीच में फैला काफी भव्य और मनमोहक ऐतिहासिक चीजों को समाहित कर रखी हुई यह किला अतीत में गोंडवाना सम्राज की कितनी वैभव और पराक्रमी और गोंड वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण रहा होगा ।जब प्राचीन काल के उन लोगों के जीवन में हमें जानकारी उन चीजों से मिलती है जो कि वह छोड़ गए हैं जैसे नgondwana कालीन किले गढ़ी चौगान मिट्टी के बर्तन शिलालेख औजार आदी ।शायद ऐसा अनुमान है कि वह काफी पुराना से लगभग 12 या 13 वीं सदी के बीच का होना प्रतीत होता है यह इतिहास में मध्यकालीन ईसा पूर्व की 13वीं सदी या मध्यकाल का आरंभ हुआ होगा। जिसमें की गढी़ के आसपास में रह रहे ग वीरान गांवअम्हा का अमझिर .कसहा विजय हटा बिछिया लो कानपुर यादि गांव के लोग निवासरत रहे होंगे कालांतर में अज्ञात कारण वश या जनश्रुति अनुसार महामारी या कुछ शासक के आक्रमणों के कारण या अज्ञात कारणों के कारण गांव से वहां के निवासी अपना आशियाना छोड़ कर चले गए होंगे शायद खोज और अनुसंधान का विषय है ।इन सब परिवर्तनों ने गांव के लोगों के सामाजिक जीवन के अनेक पक्षों को प्रभावित किया रहा होगा साथ ही मध्यकाल का प्रारंभ होने से अनेक राज्य गोंडवाना समाज में आक्रमण कर पतन का कारण हुआ होगा। जिसके कारण उनके किले गढीं को नष्ट कर सकता नस्ताबबूध कर दिया होगा। यह 907 ई. पूर्व. गसंग्रामशाही के राज के समकालीन या मुगल शासक महमूद गजनबी के समकालीन रहा होगा। उस भीतरी गढ़ में सामने से देखने परभीतरीगढ़ के गांव एवं गढ़ी में पेन ठाना निर्माण उनकी सुरक्षा के लिए Raja और धनी कोई दूर उदारता से धन और भूमि का दान करते रहे होंगे गोंड महाराजा कुड़ापा राजाओं के बनवाए पेन ठाना बहुत वैभवशाली तथा भव्य रहा होगा ।जो आज जींर्ण sin शीर्ण अवस्था में विद्वान है ।दुर्गम पहाड़ी के ऊपर बड़ी-बड़ी चट्टानों एवं पहाड़ियों को काटकर बनाए गए सुंदर महल बना था। जो कि सामने से सुरक्षा चौकियों मे आकृति बनी हुई है जो उस दुर्गम जगह लखनिया ईटों से व पत्थरों से बनी हुई है जो कि समुद्र सतह से लगभग 1100 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित है ।वहीं पर पेनठाना में खंडित अवस्था में काली कंकाली की प्रतिमा व आकृति खंडित अवस्था में मिली ।वहां पर निर्मित भूखंड हनुमा महल को लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ हैं। जिसमें अपना पेनठाना पुरखादेव कली कंकाली का एक कमरा होता था और एक प्रवेश करने वाला हाल हुआ करता था। वह बरामदा रहा होगा परंतु जानकारी के अभाव में गोंड कालीन समाज की गढी़जर्जर व नष्ट होने की कगार पर पहुंच गया है। जिससे कि सामने से देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि वह आकार के निरीक्षण बड़ा आकार का हालनुमा बनाया गया रहा होगाथा। ताकि प्रत्येक व्यक्ति व बाहरी दुश्मन को आक्रमण के समय जान सके जिससे कि सजग रहा जा सके जहां ऐसा प्रतीत होता है कि नीचे गर्व है या नीचे जाने वाली सुरंग होने का सुराग होना प्रतीत होता है ।जो अव्य वस्थित अवस्था में है गढी़में उपरोक्त गांव के लोग राजा से अपने समस्या लेकर व धार्मिक उत्सव में एवं सामाजिक कार्यों में शायद आना-जाना बना रहा होगा ।आसपास के लोग एकत्र होते रहे होंगे गढी़का निर्माण अनगढ़ काले बड़े पत्थरों से निर्माण किया गया है ।जो आज भी मजबूत स्तंभ के साथ गोंड कालीन साम्राज्य को बयां करती तस्वीर शायद यही आज की पीढ़ी से कह रही हो कि हमारा समृद्ध साली राज्य विस्तार कितना वैभवशाली पराक्रमी साहसी रहा होगा। चारों ओर से लगभग नीचे पहाड़ी में 60 या 70 मीटर के नीचे से पत्थरों की शानदार जुड़ाई की गई है। उन्हीं के अंदर Raja का निवास स्थान रहा होगा महल के बाजू में नदी प्रवाहित होती है जो कितना भव्य और शानदार वहां का प्राकृतिक सौंदर्य और नजारा है फिलहाल कोडोपा राजवंश के राजा के बाद वंशावली अभी प्राप्त नहीं हो सकी है जैसे ही उस राजवंश के वंशावली की पहचान खोज निरिक्षण अनुसंधान होती है उसे हम आप सभी सभी लोगों के सामने रखने का प्रयास किए जाएंगे उस गढी़को शायद किस विभाग के कब्जे में है यह पता नहीं चल सका है लेकिन हम अपने समाज के सगा जनों से अनुरोध करना चाहते हैं कि उसने एक रहस्य नुमा गढी़ के संरक्षण सुरक्षा संवर्धन व रखरखाव करने में संगठित होकर प्रयास करें ताकि हम अतीत के उस वैभवशाली इतिहास को अपने लोगों तक पहुंचा सके इसके पश्चात अपने राजा महाराजाओं गढी़ किलो की पहचान हो सके हमें पूरी आशा और विश्वास है कि आप इस लिखने में और भी जानकारी देने के साथ-साथ ऐतिहासिक जानकारी जुटाने में हम सबका कर्तव्य है।