छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा कोरिया के महंत मरकाम युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष बने, युवाओं में खुशी की लहर ।

(गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज विशेष प्रतिनिधि द्वारा)

कोरिया छत्तीसगढ़ GCG NEWS 28 मई 2022, जाहिर तौर पर सच कहें,तो यह इलाका मध्यभारत तत्कालिन गोंड राजवंश का गोंडवाना साम्राज्य रहा है। आजादी पूर्व देश में तकरीबन 258 गोंड रियासत बताया जाता है। अमूमन जानकारी के अनुसार गढ़ा मंडला जो  गोंड राजवंश के राजा हृदय शाह के साम्राज्य कालीन सन 1751 में  52 गढ़ 57 परगना के नाम से कोरिया राज एक हिस्सा था। कालान्तर में कई ऐसे गैर लेखक हुए जो गोंडवाना साम्राज्य पर पर्दा डालते रहे। लिहाजा गोंड समुदाय के लोग अपने मूल इतिहास से कटते चले गये। और गैरों के इतिहासों पर भरोसा करते रहे। आज गोंड राजवंशों के इतिहास के फड़फड़ाते पन्नों को यदि पलटें, तो गोंडवाना का वैभव शाली साम्राज्य झलक उठता है। वहीं समाज के बुजुर्गों की मानें तो खोई हुई इतिहास सामने आ जाती है।

जैसा कि हमारे पूर्वजों की मानें, तो यह इलाका  उस जमाने में  “कोड़या राज” के नाम से जाना जाता था। जिस समय राजा हिंगोलसाय पोया जिनका निवास गढ़ पहाड़ में बताया जाता है। जिनका पहला पुत्र करिमन शाह और दूसरा पुत्र रघुराज शाह थे। उस समय राजा करिमन शाह के पुत्र घुघुस शाह पोया जिनका निवास “नगर” में था। तथा जो नि:संतान थे। गौरतलब उनके भाई राजा रघुराज शाह पोया जिनका पहला पुत्र बसंत सिंह दूसरा शिवमंगल सिंह जिनका गढी स्थान सोनहत में बताया जाता है।

आज भी नगर में राजा के गढी के आस पास  बड़े बड़े पुराने वृक्ष हैं। यह कहना है कि एक जमाना था, जिस जमाने में नगर के राजा घुघुस शाह पोया अपने सैनिकों के साथ रीवा एक लड़नी में गये थे, जब रीवा से जीत कर आ रहे थे। कि गढ़िया नगर में जब जीत की खुशी को लेकर आरती सजा रहे थे। कि राजा के गढ़िया में दुर्भावना से प्रेरित होकर एक नाई जो रानी को भ्रामक जानकारी दिया, कि तुम्हारा राजा लड़नी में जूझ गया है, याने कि मौत हो गया। अब तुमको अर्धांगनी स्वीकार करना पड़ेगा। जिसके वियोग में रानी एक खत लिख कर एक कुंआ में डूब गई। जब राजा अपने गढ़िया में लौटा, और रानी के द्वारा लिखी चिठ्ठी को जब राजा पढ़ा और रानी की वियोग में राजा घुघुस शाह पोया भी उसी कुआं में डूब गया । बताया जाता है कि इसके बाद सौनहत का उतराधिकारी शिव मंगल सिंह और  बैकुंठपुर का उतराधिकारी बसंत सिंह बन गए।

वहीं बसंत सिंह के मरने के बाद नि:संतान  शिवमंगल सिंह बैकुंठपुर का उतराधिकारी बन गया। बताया तो यह भी जाता है कि रामानुज प्रताप के पिता को मुंशी के रुप में रखा गया था। जिन्होनें नि:संतान राजा शिवमंगल सिंह से मरते समय एक पीतल के स्टाम्प में वसीयत लिखवा लिया। वहीं वुजुर्गों द्वारा यह भी कहा गया है कि राजा शिवमंगल सिंह पोया के रखैल पत्नी के तरफ से एक पुत्र था,  जिसे लडकी बता कर छल दिया गया,और बंगाली कोरिया का राजा बन गया। कुल मिलाकर इस प्रकार की जुबानी कहानी के बाद गोंडवाना साम्राज्य के गोंड राजवंश का कोरिया रियासत के हकीकत का अंत हो गया। पर आज के युवा पीढ़ी जानना तो दूर, अपने पूर्वजों का इतिहास को झंकना तक नहीं चाहते हैं, न तो प्रेरणा लेना चाहते हैं ।लिहाजा अज्ञानता के कारण आज यहां के गोंड राजवंश के लोग अपने ऐतिहासिक  जमीर से कट कर पराए बनते जा रहे हैं।

वहीं आज कुछ  पढ़े लिखे युवा पीढ़ी ये तो जरुर है कि समाज के इतिहास को कुरेदना चाहते हैं।एक ललक है। इसी उदेश्य को लेकर कोरिया जिला के पटना जो पूर्व जमींदारी था। जो पोया राजवंश से जुड़ा है। जहां के कुछ भावी पीढ़ी छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा का गठन किया गया है। जहां पर बीते दिनों दिनांक 27 मई 2022 दिन शुक्रवार को पटना 84 परगना के ग्राम पंचायत परिसर पटना में छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा का बैठक छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के उपाध्यक्ष बलिंदर प्रसाद आयाम जी के नेतृत्व में संपन्न हुआ जिसमें छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा का विस्तार करते हुए कोरिया जिला में छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा का जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें पटना के पूर्व सरपंच श्री राकेश प्रताप सिंह जी – संरक्षक जिला कोरिया, श्री विजय सिंह पोया जी बैकुंठपुर – अध्यक्ष जिला कोरिया, श्री जगमोहन सिंह पेंद्रो जी सोरगा – कार्यकारिणी अध्यक्ष जिला कोरिया, श्री धनसाय सिंह मरावी जी मुरमा – उपाध्यक्ष जिला कोरिया, श्री चंद्र प्रकाश श्याम जी पटना – कोषाध्यक्ष जिला कोरिया, श्री महेंद्र सिंह पोया जी बिलारो – महा सचिव जिला कोरिया, श्री महंत सिंह मरकाम जी कसरा – अध्यक्ष युवा प्रभाग जिला कोरिया एवं श्रीमती प्रमिला सिंह पुषाम जी पटना – अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ जिला कोरिया के पद पर उपस्थित गोंड समाज के सदस्यों द्वारा मनोनीत हुए। छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा का कोरिया जिला में जिला कार्यकारिणी गठन होने पर जिले भर के गोंड समाज में भारी उत्साह बना हुआ है।

(उपरोक्त समाचार के कुछ लेख समाज के बुजुर्गों पर आधारित है, ठोस प्रमाणिकता नहीं। जो लेख स्वतंत्रता की दायरे में व निजी है, जो किसी समाज को उद्देलित करना नहीं)