विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो गर्भवती महिलाओं के जच्चा-बच्चा सुरक्षित नहीं रहने, ग्राम स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा देख-रेख ठीक ढंग से नहीं करने के संबंध में कमिश्नर व संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा संभाग को पंडो आदिवासियों की ओर से दिया ज्ञापन
बलरामपुर छत्तीसगढ़ /GCG NEWS/ 16 मई 2022 जिले के अंतर्गत सबसे ज्यादा गरीबी और कुपोषण से जूझ रहे, जिन्हें सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी पंडो आदिवासी जन जाति के रुप चिन्हित किया गया है। तथा राष्ट्रपति के दतक पुत्र भी माना जाता है। जो पूरे सरगुजा संभाग में इन वर्गों की स्थिति वेहद खराब चल रहा है। सबसे ज्यादा गरीबी की मार और कुपोषण का शिकार यहाँ के पंडों जनजाति जिनके वेहतरी के लिए सरकार केवल कागजों में खाना पूर्ति करती है। वास्तविक धरातल में आज भी इनके विकास नगण्य है। इसी प्रकार की मामले में इन दिनों कुपोषण के शिकार एवं चिकित्सा सेवाओं के अभाव में पंडों जाति के महिलाएं एवं बच्चे असमय मौत के गले में समा रहे हैं।
विशेष पंडो पिछड़ी जन जाति के अध्यक्ष जिन्होनें एक विज्ञप्ति के माध्यम से गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज को अपने जानकारी में बताया है कि जिला बलरामपुर जो सरगुजा संभाग के अंतर्गत निवासरत पण्डो विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों में जच्चा-बच्चा सुरक्षित नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं के शरीर में अत्यधिक खून कमी होने के कारण अल्प रक्त के कमी के लगातार बीमार हो रहे हैं। अंत में सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने के सरकारी अस्पतालों में बरती जा रही उपेक्षा के शिकार महिलाएं जिनके पेट में बच्चों का मौत होना एक विषम समास्यायें बन गया है।जैसे अनेक समस्याएं सामने आ रहे हैं। जबकि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार से निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराया जाता है।निशुल्क खून जांच एवं स्वास्थ्य परीक्षण, खून बढ़ने की दवाईयां, नियमित ब्लड प्रेशर जांच , टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की वजन करना , गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक तत्व पूर्ण करने के लिए विभिन्न प्रकार के पोष्टिक आहार दिया जाता है, बावजूद भी इन वर्गों को समय पर नहीं मिल पाता है। लिहाजा इन सभी सुविधाओं के वावजूद भी पण्डो विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के महिलाओं में खून की कमी और जच्चा-बच्चा सुरक्षित नहीं रहने का समस्या हमेशा सामने आते रहा है। इससे यह पता चलता है कि ग्राम स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा अपने कार्यों अच्छे से निर्वाहन नहीं कर रहे हैं।हाल ही में कलेश्वरी पण्डो पति धरमजीत पण्डो उम्र 25 वर्ष
पण्डो विशेष पिछड़ी जनजाति सदस्य, ग्राम बोंगा पोस्ट गोविंदपुर थाना रमकोला विकास खंड प्रतापपुर जिला सूरज पुर निवासी का शरीर में 3 ग्राम खून होने के कारण और इसका बच्चा का जन्म लेते ही मौत हो गया।
पार्वती पण्डो पति सुदर्शन पण्डो ग्राम खर्रा भैया थान ओड़गी जिला सूरजपुर निवासी का 6 माह पहले प्रशव पीड़ा होने पर भैया थान अस्पताल और जिला अस्पताल सूरजपुर से रिफर कर मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर सरगुजा में भर्ती कराया गया था। *पार्वती पण्डो का इलाज के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों का मौत हो गया था।
वहीं सुनिता पण्डो पति प्रदीप पण्डो ग्राम त्रिशूली थाना सनावल रामचंद्र पुर ब्लॉक जिला बलरामपुर-रामानुजगंज छग निवासी के शरीर में खून कम था और पेट में ही बच्चे का मौत हो गया था। फूलबस पण्डो पति रामजन्म पण्डो उम्र 27 वर्ष, ग्राम पंचायत बरवाही रामचंद्र पुर ब्लॉक जिला बलरामपुर-रामानुजगंज की निवासी के शरीर में 5 ग्राम खून है। और इसका बच्चा बीच में ही खराब हो गया है। फुलकुंवर पण्डो पति अखिलेश पण्डो उम्र – 26 वर्ष ग्रामपंचायत डिण्डो पोस्ट सलवाही थाना त्रिकुण्डा रामचंद्र पुर रामानुज गंज ब्लॉक जिला बलरामपुर निवासी के शरीर में 8 ग्राम खून है और इसके पेट में बच्चे का मौत हो गया है। जिसके बड़ा आपरेशन से डिलेवरी कराया गया है। बबीता पण्डो पति रामसेवक पण्डो कसरईया पारा ग्रामपंचायत महादेव पुर रामचंद्र पुर ब्लॉक जिला बलरामपुर निवासी इसका नार्मल डिलीवरी घर पर 6 माह पहले हुआ था , बच्चा बहुत कमजोर था मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था इलाज कराने के दौरान बच्चे का मौत हो गया था। और बबीता पण्डो के शरीर में 4 ग्राम खून मात्र था। जिसके कारण इसका भी स्थिति बहुत ही दयनीय था। मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर में भर्ती कराया गया 3-4 बोतल खून चढ़या गया था।
इन सभी समस्याएं स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी के लापरवाही के कारण हो रहा है समय के साथ नियमित जांच का अभाव है। दौलतिया पण्डो पिता देवधारी पण्डो उम्र 60 वर्ष ग्रामपंचायत डूगरू रामचंद्र पुर ब्लॉक जिला बलरामपुर-रामानुजगंज निवासी के शरीर में 6 ग्राम खून है।
जिला बलरामपुर में पण्डो विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए जिला प्रशासन के द्वारा जन-जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं इसके बाद भी गंभीर मरीजों का पता नहीं लगा पा रहे हैं। अनेक पण्डो मरीजों के शरीर में काफी खून होने का मामला सामने आ रहा है, अगर पहले इसके बारे में जानकारी होने पर मरीज को ज्यादा समस्या नहीं होता। जब ज्यादा स्थिति खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया जाता है तो उस मरीज को 3-4 बोतल खून चढ़ाने की जरूरत होती है जो कि पण्डो परिवारों के द्वारा खून देने से असमर्थ होते हैं वे खूद कुपोषित कमजोर होते हैं इस लिए अधिकतर देखा जाता है मरीज के परिजन रक्त दान नहीं कर पाते हैं। सभी मरीजों का इलाज शासकीय मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर में हो रहा है ।
और सभी मरीजों के शरीर में खून कमी के कारण एवं गर्भवती महिलाओं के ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के द्वारा अच्छा से देख-रेख नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण मरीजों के अनेक समस्याएं हुएं हैं। मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को खून की अति आवश्यकता है खून व्यवस्था करने की पहल किया जाना अति आवश्यक है। उक्त सभी मरीजों के संबंध में बारीकी से जांच कर लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई किया जाये। ताकि और अनभिज्ञ विशेष पिछड़ी जनजाति के गर्भवती महिलाएं और जच्चा-बच्चा असुरक्षित न हो।
उदय कुमार पण्डो
प्रदेश अध्यक्ष
छ.ग. प्रदेश सर्व विशेष पिछड़ी जनजाति समाज कल्याण समिति