कोरिया जिले के खड़गवां स्थित ग्राम पंचायत लकरापारा के भुलेरीपाठ देवस्थल में 1दिसंबर 2021 को होगा एक दिवसीय गोंडवाना गोंड महासभा द्वारा गोटूल पंरपरा के तहत भव्य कार्यक्रम का आयोजन, समाज के हर घर को आमंत्रित।
कोरिया जिले के खड़गवां स्थित ग्राम पंचायत लकरापारा के भुलेरीपाठ देवस्थल में 1दिसंबर 2021 को होगा एक दिवसीय गोंडवाना गोंड महासभा द्वारा गोटूल पंरपरा के तहत भव्य कार्यक्रम का आयोजन, समाज के हर घर को आमंत्रित।
कोरिया खड़गवां / छत्तीसगढ /GCG NEWS/ 27 नवंबर 2021 पांच दशक के बाद 21वीं सदी में गोंड जन जाति आदिवासी समाज अपनी उपेक्षा गरीबी अशिक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव वेरोजगारी एवं बंधवा मजदूर जैसी समस्याओं से समाज ग्रसित है। जिन्हें समानता का अवसर दिलाने जैसे अहम मुद्दा के लिए अपनी सामाजिक लोक सांस्कृतिक पहचान को कायम रखने के लिए तथा विविध विषयों पर संगोष्टी के लिए गोंडवाना उदय समाचार प्रकाशन समूह के संस्थापक डॉ एल एस उदय ने प्रेस को बताया कि आज हमारा काम है, कि समाज के स्वभिमान को जगाना। आज लोग अंधी दौड़ लगा रहे हैं, जोअपनी भाषा, धर्म संस्कृति से दूर, उथले काई की तरह इधर से उधर तैर रहे हैं । जिनका कोई सांस्कृतिक पहचान नहीं। हम चाहते हैं, कि हमारी पुर्वजों का सांस्कृतिक पहचान जीवंत रहे। जैसा कि गोंडवाना की 18 सौ वर्षो का ऐतिहासिक साम्राज्य से जुड़े लोग आज अपनी सामाजिक पंरपरा से दूर होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में हमारा प्रयास है कि गोंडवाना की गोटूल जो हमारा सांस्कृतिक विरासत है, जो बनी रहे। इसलिये हम मध्यभारत के बहुसंख्यक गोंड समाज की ओर से अपनी पारंपरिक जमीर को बनाए रखने हेतु गोटूल निर्माण के लिये संकल्परत हैं। इन्हीं उदेश्यों को लेकर डॉ उदय ने कहा कि,गोंडवाना समाज के प्रबुद्ध भाईयों एवं बहनों अपने सामाजिक सरोकार से जुड़े और संगठन में अपना योगदान दें। जिस गोटूल में हमारा मातृभाषा गोंडी निहित होगा। उन्होनें कहा कि आज कोरिया जिले का यह खडगवां कमरों गोंड राज परिवार का एक जमींदारी हल्का है।जहाँ बेगारीकाल से लेकर अब तक गोंंड वंश का बाहुल्य है। दुर्भाग्य से निस्तार के लिये अन्य लोगों को अपने जगह जमीनों में बसाया, लेकिन दूूर्भाग्य है, कि वही लोग आज आंख तरेरते दिखते हैं। और हमारे सांस्कृतिक पहचान को मिटाने में लगे हैं। इसलिये हम चाहते हैं। यहाँ पूरखों के कई आस्था शक्तियों से जुड़ी हुई सारी विधाओं का केंद्र बिंदू स्थापित हो, जिसे हमारे पूर्वज ने संजोये रखा है। जिसे आज के पढ़े लिखे पीढ़ी भूलते जा रहे हैं। जिसे बचाए रखने के लिए यह हमारा प्रयास होगा। इसी उद्देश्य को लेकर हम समय समय पर कार्यक्रम को आयोजित करते रहते हैं। उन्होने कहा कि यह शंदेश जिसे भी पढ़ने या सुनने के लिये मिले, जो भी साधन हो,जैसा भी हो, तन मन धन से यहाँ आयोजित कार्यक्रम में जरुर पहुंचे। और यह संकल्प लेकर निकलें, कि हम अपने लिये नहीं, बल्कि आज हम अपने समाज के लिए आज का दिन को दान दे रहे हैं। क्यों कि समाज से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं होता चाहे कितनों बड़ा ओहदे मे इंसान क्यों न हो। रिटायर के बाद,कुल मिलाकर उम्र खप जाने के बाद एक न एक दिन समाज में कदम तो रखना ही होगा। इसलिये समाज के भाईयों एवं बहनों अपने जमीर से कभी मत भागिए! क्यों कि, समाज ने हमें गोदी दिया,रोटी और बेटी दिया,और तो और मरने पर कंधा भी देगा। पर आप सोचियें,आपने समाज को क्या दिया? इसलिए समाज है, छोटी मोटी दरारें होगा ही, हम एक जुट रहें। जिस प्रकार बच्चों की रक्षा के लिये पक्षी बाज से भी लड़ती है। उसी प्रकार समाज के भावनाओं के साथ किसी ने कुठाराघात किया, तो लड़ेगे ही। आज मध्यभारत में गोंड समाज एक भारी भरकम संख्या में होने के बाद भी गरीबी के कारण समाज के बहू बेटी जिनके शरीर में शादी की हल्दी की रंग नहीं छूटता, कि बहू सड़कों में काम करते दिखती है। क्या आपको अच्छा लगता है? जो पाते हैं, उठाकर ले जाते हैं। माता पिता आंसू की घूँट पीकर चुप रह जाते हैं,आज शिक्षा का अभाव और गरीबी और नशा कमोवेश आज समाज कमर तोड़ कर रख दिया है। थाना अदालत में आज हमारे लोग दिखते हैं, जिनका रही सही पूंजी भी कहीं न कहीं से जा रहा है। आज जो भी देखता तो शंका का निगाह रखता है,कि कुछ मांगेगा तो नहीं इन सभी विन्दुओं पर हम सभी पढ़े लिखे बौधिक चेतना से जुड़े लोगों आम आदमी,युवा यु वती, नेता मंत्री, कर्मचारी अधिकारी, जिनका विचार जानने के लिए इस गोटूल की गोद में एक विचार गोष्ठी का आयोजन कोरिया जिले के तत्कालीन खड़गवा कमरों जमींदारी के दक्षिणी छोर हसदो नदी की तराई मुख्य मार्ग में प्रचीन पुरातात्विक स्थल भुलेरीपतेरा देवी स्थल पर 1दिसंबर 2021को कार्यक्रम आयोजित है। अवश्य पधारें।