छत्तीसगढ़ स्थित सरगुजा संभाग में आदिवासियो का प्राचीन आस्था केंद्र बछराज कुंवर गढ़ धाम को गैर ट्रस्टी समुदाय द्वारा हड़पने के खिलाफ, दायर जनहित याचिका में सरकार से कोर्ट ने शीघ्र मांगा है,जबाव।



रायपुर (GCG NEWS)27 जनवरी 2021

प्रदेश के भीतर आदिवासियो की विशेष अधि सूचित  क्षेत्र सरगुजा संभाग के जिला बलरामपुर स्थित बहु चर्चित आस्था केंद्र बच्छराज कुंवरधाम में गैरट्रस्टी के नियन्त्रण के विरुद्द दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शीघ्र ही छत्तीसगढ़  उच्च न्यायालय ने सरकार से मांगा जबाब। न्यायालीन सूत्रों के मुताबिक- मानपुर स्थित बाबा बच्छराज कुंवरधाम को गैर आदिवासियों द्वारा ट्रस्ट के माध्यम से नियंत्रण करने के विरुद्ध जनहित याचिका के सुनवाई पर उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी कर सरकार को   सप्ताह भर केे भीतर जवाब प्रस्तुत करने का दिया आदेश।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य सुदुर वन-अंचल जिला बलरामपुर के ग्राम मानपुर में आदिवासियोंं  के द्वारा पूज्यनीय पवित्र स्थल बाबा बच्छराज कुंवर धाम स्थित है। सरगुजा संभाग के स्थानीय निवासियो का बाबा बछराज कुंवर धाम के प्रति विशेष आस्था है। गौरतलब यह धाम कई सदियों पुराना तथा इस धाम की मान्यता के बारे में प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहासकार सर क्रूक ने अपनी 1896 मे प्रकाशित किताब “कास्ट एंड ट्राईब आफ नार्थ वेस्ट प्रोविंस एंड ओउध ” में विस्तृत वर्णन किया गया है। आदि काल से ही इस धाम का नियंत्रण  एवंं व्यवस्थापन स्थानीय आदिवासियो द्वारा अपनी परम्परागत रुढ़ी प्रथा द्वारा ही पूजा अर्चना किया जा रहा था। याने धाम में आदिवासियो द्वारा अपनी परम्परागत विधी अनुसार पूजा की जाती है। तथा अपनी रुढ़ी मान्यताओं के अनुसार देवता को पूजते हैं। अमूमन पूजा कार्य स्थानीय बैगा द्वारा किया जाता है,तथा धाम मे बली प्रथा भी प्रचलित है। यह क्षेत्र संविधान के पांचवी अनुसूची द्वारा संरक्षित इस क्षेत्र मे कतिपय गैर आदिवासियो द्वारा ट्रस्ट के माध्यम से नियत्रण करने का प्रयास किया जा रहा था। लिहाजतन सरगुजा संभाग के लगभग 30 ग्राम पंचायत एवं नौ स्थानीय संगठनोंं द्वारा इस संबंध मे अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष लिखित एवं मौखिक आपत्ति दर्ज करायी गयी थी ।  किंतु उनकी ट्रस्ट गठन के विरुद्ध आपत्ति पर कोई सुनवाई नही होने पर पारम्परिक आदिवासी महासभा द्वारा अधिवक्ता सुशोभितसिंह एवं सुखनाथ पैकरा तथा चन्द्र कुमार पटेल के माध्यम से  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर खंडपीठ में एक जनहित याचिका प्रस्तुत की गयी। वहीं याचिका मे बताया गया कि गैर आदिवासियो द्वारा आदिवासियो की रूढ़ी प्रथा से संचालित पूजा स्थल को अपने   नियत्रण में लेने से आदिवासियो की मूल संस्कृृति नष्ट हो जायेगी। जबकि संविधान की अनुच्छेद  244 (1)एवंं पांचवी अनुसूची के तहत 13(3) के तहत आदिवासियो को विशेष संरक्षण प्राप्त है। उच्च न्यायालय ने याचिका का संज्ञान लेते हुए शासन को नोटिस जारी कर सप्ताह भर के भीतर  जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।