बस्तर के फरसगांव घोटूलपारा में आंचलिक डंडार नाच की व्यापक तैयारी,

बस्तर संभाग से जितेन्द्र कुमार मंडावी की रिर्पोट

बस्तर कोंडागांव, गोंडवाना उदय/ GCG न्यूज ग्रुप, 20 जनवरी 2024, यूं तो यहां बस्तर के मूल निवासियों का संस्कृति ही इनका पहचान होती है।

जानकारी की मानें तो यहां आदिवासियों का नया साल का पहला महिना पौष जनवरी आते ही ग्राम घोटुलपारा फुंडेर तहसील फरशगांव जिला कोण्डागांव जो बस्तर संभाग छत्तीसगढ़ में आता है  यहां के गोंड हलबा आदिवासियों का मुख्य पारम्परिक सांस्कृतिक नाच डंडार,कोलाग नाचा होती है, जिसकी तैयारी इन दिनों जोरशोर से चालू हो चुका है। जो हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी घोटुलपारा के लोग डंडार जाने की तैयारी कर ली है। जानकारी के मुताबिक आदिवासी समुदाय के लोग अपनी मातृ भाषा गोंडी में डंडार गीत गाते हैंऔर आस पास के हर गांवों में लगातार एक सप्ताह भर तक दिन रात पारम्परिक रूप से नाचते गाते हैं। जिसमे कार्यक्रम में सभी पुरुष 17 वर्ष से 80 वर्ष तक इस पारा के समस्त सभी आदिवासी लोग शामिल होते हैं। इस पारा के 63 घर के प्रत्येक घर से 1 से 3 लोग होगे शामिल होगें। कमोवेश लगभग 135 लोग डंडार नाचा परंपरा को स्वतंत्रता दिवस समारोह को मानने के बाद निकलेंगे। डंडार नाचने जिसमें आदिवासियों की विभिन्न प्रकार की वेश भूषा गुंगरू,गेरी, कावड़, आदि सैकड़ों प्रकार के वेश भूषा धारण करके निकलेगी, जिसमें खाने पीने की समान में दाल, चांवल, सहित पहनाव ओढाव आदि रहेगें शामिल ।