कोरिया छत्तीसगढ़ (GCG NEWS) ,जिले के जनजाति बाहुल्य इलाका खड़गवां तहसील में जितने भी धानखरीदी केंद्र संचालित है। जहाँ किसान बारदाना के लिए तरस उठे हैं। वहीं बिचौलियों द्वारा सैकडों किवंटल धान स्वराज्य माजदा एवं ट्रेक्टरो में बारदाना युक्त धान की परिवहन कर रहे हैं। किसानो द्वारा
दबे जुबान जिनका कहना है कि आदिवासियों के नाम पर उनके ही भूमि पट्टों पर ये बिचौलियो द्वारा हजारों किवंटल धान प्रतिदिन समिति खपाने की जानकारी है। वहीं समितियों द्वारा किसानों के लिए बारदाना की रोना रो रहे हैं।पर बिचौलियों के लिये पीछे की दरवाजा रात दिन खुला है। जो धड़ल्ले से धान भर कर जिनके लाए धान को चंद घंटो में खरीद लिया जाता है। वहीं समिति प्रबंधकों द्वारा किसानोँ की धान खरीदी के पहले बारदाना की रोना रोते हैं। बीते साल तामडॉड़ निवासी श्री सिंह गोंड आदिवासी द्वारा जिल्दा समिति से महज 10 बोरी यूरिया खाद उठाया था। जिसके नाम पर चोरी छिपे 1 लाख 34 हजार रुपये का (के सी सी) कर्ज चढ़ा दिया गया । इस वर्ष जब वह किसान 84 किवंटल धान बेचा। जिस किसान की धान की राशि को कर्ज में कटौती कर लिया गया। जब खुलाशा हुआ तो जिल्दा प्रबंधक द्वारा चुपके से कुछ राशि को लौटाया गया।और अभी कुछ राशि स्थानीय प्रबंधक द्वारा न देने की जानकारी उक्त किसान के साथी जो उसके खाते में अपना धान मिला कर बेचा था। जिसनें इस बात का खुलासा न्यूज के सामने किया है। और बताया कि आदिवासी किसान को हवा तक नहीं पहुंचा, कि मेरे नाम पर कर्ज निकला है। वैसे तो ऐसे समितियों की यह खेल दशकों से चल रहा है।जहाँ क्षेत्र के भोले भाले आदिवासियों के भूमि खातो पर गैर तबके के बिचौलियों द्वारा धड़ल्ले से अवैध धान सस्ते कीमतों में क्रय किया जाता है।और जिसे खपाने के लिए भोले भाले आदिवासी किसानों को चंद रकम देकर और पैसा देने का लालच देते हैं।और भूमि पट्टा रख लेते हैं।उनके नाम पर बकायदा बैंक खाता खोलवा अपने पास रख लेते हैं। जैसे ही धान का पैसा चढ़ता है।कि बिचौलियोँ द्वारा बैक के दहलीज में खड़ा करके रकम निकवाया जाता है।और सारी रकम झटक लेते हैं।वहीं आदिवासी किसान हाथ मलते रह जाता है।जिससे सरकार को करोड़ों रुपयों नुकसान होता है। और जिसका लाभ किसानों को नहीं, बल्कि बिचौलियों को जाता है। सूत्रों की मानें तो सबसे ज्यादा लाभ तत्कालीन भाजपा शासनकाल में बिचौलियों ने उठाया था। सच मानें तो सैकड़ो किसानों के नाम पर दलालोँ ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत आदिवासियों के नाम पर कर्ज लियाा था। सरकार बदलते ही कर्ज माफी की घोषणा होते ही इन बिचौलियों का किस्मत बदल गया। जो खड़गवां तहसील के हाट बाजारो के इर्द-गिर्द सड़क किनारे फट्टे लगा कर किलो किलो धान के लिए बाट चढ़ा कर तौलते नजर आते थे। आज इसी धान के बदौलत अट्टालिकाओँ के मालिक हैं। वहीं समितियों में काम कर रहे प्रबंधकों से लेकर मोटे कर्मचारियो जिनके सड़क किनारे चमचमाते महल सबके नजरों को आज चौधियां देती है। वहीं बेचारा किसान चार आंगुर पेट के लिए संघर्ष करते दिखता है।यह कोई कहानी नहीं,हकीकत है। जिसे स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों सहित स्थानीय समिति के प्रबंधक जानते हैं। कोरिया जिले मे सर्वाधिक खड़गवां तहसील के धान संग्रहण केंद्रो में बिचौलिया का एक राज हैं। इस दिशा में प्रशासन मौन है। प्रशासन को चाहिये,कि किसानों के भूमि पट्टे के रकबा का उपयोग करने वाले बिचौलियों पर कड़ी कार्यवाही हो।