कोरबा जिला के अनूसूचित क्षेत्र कोरबी सरमा सड़क मार्ग में बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रामीण हुए लामबंद, 20 जनवरी को एसईसीएल सिंदूरगढ़ रानीअटारी खदान पर ताला बंदी का हुआ ऐलान।
कोरबा जिला के अनूसूचित क्षेत्र कोरबी सरमा सड़क मार्ग में बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रामीण हुए लामबंद, 20 जनवरी को एसईसीएल सिंदूरगढ़ रानीअटारी खदान पर ताला बंदी का हुआ ऐलान।
कोरबा 12 जनवरी 2023, जिले से तकरीबन 70 किलोमीटर उतर पश्चिमी क्षेत्र तिरिया जंगल वर्तमान में सिंदूरगढ़ के नाम से कोल इंडिया एसईसीएल का संचालन होते ही बदल गया। कहने को तो ऐसे इलाकों में पेशा एक्ट के तहत ग्राम सभा एक कानून है। लेकिन इन क्षेत्रों में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को इस कानून का आशय ही मालूम नहीं है। थोड़ा बहुत कानून की आधिकारिक जानकारी रखने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि प्रबंधन के गुलाम हो जाते हैं। जो इस क्षेत्र की बुनियादी विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौति है। वहीं अरबों रुपए की वेल फेयर रॉयल्टी की राशि से कोल उत्खनन क्षेत्र के आसपास कम से कम 10 किलोमीटर की दूरी तक वेल फेयर की राशि से शिक्षा चिकित्सा सड़क बिजली पानी की सुविधाएं प्रदान करना था। प्रबंधन और प्रशासन के नुमाइंदे हजम कर लेते हैं। इसे प्रभावित गांव के अशिक्षित भोले भाले आदिवासी जनता आखिर किस मुंह से प्रबंधन से सवाल पूछें जिन्हें वेल फेयर फंड क्या होता है, जिन्हें पता तक नहीं होता।
तकलीफ तो अब हो रही है कि कोयला खदान से साइडिंग मार्ग से गुजरने वाली बड़ी हाईवा जिनके चक्के की धूल से उड़ती प्रदुषण अब मानव जीवन के लिए व्यापक खतरा बन गई है। यहां सड़क मार्ग से गुजरने वाले नन्हें बच्चे बच्चियों जिन्हें शिक्षा के लिए स्कूल पहुंचना होता है। जिन्हें गुफ कोहरे नुमा सड़कों से गुजरना होता है।
प्रदुषण को लेकर ग्राम सरमा निवासी एक उच्च शिक्षित विधि स्नातक तथा जनपद पंचायत सदस्य दीपक कुमार उदय जिनके नेतृत्व में आए दिन बढ़ते प्रदुषण को लेकर एस ई सी एल प्रबंधन से लेकर जिला प्रशासन के नुमाइंदे तक जनता की आवाज को लगातार मुखर होकर विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं। लेकिन प्रबंधन और प्रशासन को जर्जर सड़क मार्ग में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कई बार ज्ञापन देने की जानकारी मिली है। लेकिन वर्तमान प्रशासन लगातार इस दिशा में मूक दर्शक बनी हुई है।
हाल में जनपद पंचायत सदस्य एवम गोंडवाना समाज के युवा प्रमुख के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने स्थानीय अनुविभागीय दंडाधिकारी एक ज्ञापन सौंपा तथा कहा है कि लगातार प्रबंधन द्वारा स्थानीय ग्रामीणों के साथ उपेक्षा का व्यवहार कर रही है। न्याय संगत नहीं है। सड़क मार्ग जर्जर स्थिति तथा बढ़ते प्रदूषण को लेकर श्री उदय ने गंभीर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि कोरबी से रानी अटारी तक जो सड़क मार्ग की स्थिति इस कदर खराब हो गई है क्या क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि एवम प्रशासन को मालूम नहीं है। उन्होंने कहा है कि यदि इस दिशा में प्रशासन हरकत में नहीं आती तो प्रभावित गांवों के सभी महिला पुरुष जन प्रतिनिधी मिल कर रानी अटारी बीजा वेस्ट खदान में ताला बंदी कर कोयला उत्पादन रोक देंगे। इस पर किसी की क्षति प्रशासन का होगी।
यूं तो यह क्षेत्र पांचवी अनुसूचित जनजाति युक्त क्षेत्र है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यहां पर बाहरी लोगों की दबदबा है। वहीं यहां पर स्थानीय आदिवासियों की अज्ञानता और गरीबी बाहरी लोगों के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया है। यहां पर प्राइवेट कंपनी जो अनुबंधित है जो ठेका मजदूरों के बीच कमीशनखोरी एक अड्डा बन गया है।
जानकारी की मानें तो ऊर्जा नगरी कोरबा जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र पोंड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम कोरबी से लेकर रानी अटारी सरमा, सुखरीताल, जल्के, तनेरा, पनगवां बीजाडांड, अड्सरा,सेन्हा ,हरदेवा, सासिन पिछले 4- 5 वर्षों से एस ई सी प्रबंधन के खिलाफ जर्जर सड़क और रोजगार ,स्वास्थ्य,पेयजल के लिए लड़ाई रहे है।लेकिन आज तक न ही ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों की बात एस ई सी एल ने ध्यान दी और न ही शासन प्रशासन ने सुनी हताश और परेशान होकर एस ई सी एल प्रबंधन के खिलाफ प्रदूषण से प्रभावित ग्रामीणों के साथ साथ विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने 20 /1/2023 से एस ई सी एल की दोनों माइंस विजयवेस्ट और रानी अटारी ताला बंदी करते हुए मेन गेट के सामने धरना बंद करते हुए प्रभावित पंचायत सरमा चौक में भी महिलाएं अनिचितकालीन धरना प्रदर्शन करेंगे जब कि सड़क और क्षेत्र की मांग पूरी नही करेगी एस ई सी एल प्रबंधन तब तक धरना देंगें। गौरतलब क्षेत्र के युवा जनपद सदस्य दीपक उदय ने इस विषय में चर्चा के दौरान बहुत अपने क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराते हुए एस ई सी एल प्रबंधन के खिलाफ ग्रामीणों और कल के भविष्य विद्यार्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का और प्रदूषण से मारने का गंभीर आरोप प्रबंधन पर लगाते हुए प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की चेतावनी दिया है।