आजादी के 75 साल बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य स्थित सूरजपुर जिला के बिहारपुर चौकापारा आदिवासी बस्ती में शिक्षा व्यवस्था हुआ खत्म, बच्चे बच्चियों को पढ़ाने के लिए पैरावट बना सहारा।
आजादी के 75 साल बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य स्थित सूरजपुर जिला के बिहारपुर चौकापारा आदिवासी बस्ती में शिक्षा व्यवस्था हुआ खत्म, बच्चे बच्चियों को पढ़ाने के लिए पैरावट बना सहारा।
यूं तो आजादी के बाद कुछ वर्ग विकास की मुख्यधारा से काफी आगे निकल गए। लेकिन विडंबना है कि यहां के आदिवासी मूलनिवासी बहु संख्यक तबका आज जिनका विकास केवल कागजों पर सिमट कर रह गई है। कमोवेश वर्तमान पीढ़ी शिक्षा की चरमराती व्यवस्था से झुलस रही है। यह कोई कहानी नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य की हकीकत है।
जाहिर तौर पर यह वह बीहड़ चांदनी बिहारपुर इलाका है जहां से सरगुजा जिला का दिग्गज आदिवासी नेता तथा दबंग मंत्री होने का नाम शुमार है। जहां लगातार सत्तारूढ सरकारो द्वारा इन आदिवासी हलकों मे जो विकास की ढिंढोरा पीट पीट कर अपनी पीठ थपथपाते रहते हैं, जिसका यह एक हकीकत है।
तकलीफ है डेढ़ दशक तक शिक्षा मंत्री रह चुके एक दबंग आदिवासी नेता के गृह जिले मे आज भी आदिवासी बच्चे बच्चियों को पढ़ने के लिए छत नहीं धान के पैरा पर पढ़ने को मजबूर हैं। जिनके लिए बने जर्जर विद्यालय का भवन जिसका तस्वीर को आज गढ़बो छत्तीसगढ़ से कम नहीं है। शिक्षा का लचर व्यवस्था के कारण जहां 2 वर्षों से विद्यालय भवन नहीं, किराए का रूम लेकर संबंधित प्रधानपाठक द्वारा पढ़ाई करा रही थी, लेकिन रूम मालिक को किराया न मिलने पर आज बच्चे बच्चियों को शिक्षक पैरावट मे पढ़ाने को मजबूर हैं। यह है आज छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासी बहु संख्यक इलाकों की हकीकत कहानी। सच मानें तो सुरजपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्र चांदनी बिहार पुर के प्राथमिक पाठशाला चौका पारा में लगभग 4 वर्षों से भवन का छत गिर गया है,लेकिन आज तक मरम्मत करवाने के लिए शिक्षा विभाग के द्वारा नहीं मिला कोई फंड से पैसा प्रधान पाठक सुश्री एस तिर्की अपने से उच्च अधिकारियों को आवेदन देते देते हुई मजबूर पर उच्च अधिकारियों ने प्रधान पाठक सुश्री एस तिर्की के आवेदन को नकारते रहे। आज तक नहीं हुई मरमत आज लगभग 2 वर्ष पूर्व से भाड़े पर पढ़ा रहे थे प्रधान पाठक लेकिन 2 वर्ष का रूम भाड़ा ना मिलने के कारण रूम मालिक ने किया घर से बेदखल जिस कारण आज प्राथमिक पाठशाला चौका पारा आकर प्रधान पाठक पैरा पर बैठाकर पढ़ाने के लिए है मजबूर प्रधान पाठक शुश्री एस तिर्की के द्वारा यह बताया गया कि मैं लगभग 6 वर्ष से भवन मरम्मत करवाने के लिए अपने उच्च स्तर के अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को अवगत करवाते आ रही हूं लेकिन आज तक भवन मरम्मत नहीं हो पाई जिसके कारण 2 वर्ष से भाड़े पर रूम लेकर पढ़ा रही हू कुछ दिन पूर्व में संसदीय सचिव एवं भड़गांव विधायक पारसनाथ रजवाड़े को भी लेटर दी हूं लेकिन उनके द्वारा आश्वासन दिया गया था कि बहुत जल्द भवन निर्माण किया जाएगा गौरतलब की बात यह है कि संसदीय सचिव व भटगांव विधायक पारसनाथ राजवाड़े लगभग 9 वर्षों से विधायक हैं जिससे साफ साफ पता चलता है कि भटगांव विधायक पारसनाथ राजवाड़े के पास 1 प्राथमिक पाठशाला चौकापारा भवन मरम्मत के लिए बजट नहीं है कुछ दिन पूर्व मे कलेक्टर सूरजपुर के द्वारा बिहारपुुर चांदनी जन संवाद शिविर के दौरान कन्हैया लाल साहू एवं कुछ स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा पूर्व कलेक्टर गौरव सिंह को आवेदन दिया गया था उक्त आवेदन पर तत्काल पूर्व कलेक्टर गौरव सिंह द्वारा संबंधित अधिकारी को उक्त बिल्डिंग का मरम्मत कराने के लिए निर्देश दिया गया था लेकिन कई वर्ष बीत जाने के कारण आज तक बिल्डिंग मरम्मत नहीं हो पाई।