हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक के लिए मशीनों से जंगलों की कटाई पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ उदय ने कड़ी आपति जताई और कहा कि आदिवासियों की बातों को सरकार बल के बदले विश्वास में मापना चाहिये। जंगलो का संरक्षण हमारा दायित्व है। विरोध होगा ही।
हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक के लिए मशीनों से जंगलों की कटाई पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ उदय ने कड़ी आपति जताई और कहा कि आदिवासियों की बातों को सरकार बल के बदले विश्वास में मापना चाहिये। जंगलो का संरक्षण हमारा दायित्व है। विरोध होगा ही।
सरगुजा, (हसदेव अरण्य) छत्तीसगढ 27 सितंबर 2022 जिले में स्थित हसदेव अरण्य राजस्थान कोल ब्लॉक आज सुरक्षा छावनी में हुआ तब्दील, हजारों पेड़ों की चढ़ी बलि,विरोध में आन्दोलन कर रहे आदिवासी प्रशासन के सामने हुए बेवस, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री ने डॉ एल एस उदय सिंह ने इस घटना की किया व्यापक भर्त्सना। जंगल मानव जीवन का आधार है। जल जंगल और जमीन बचाना होगा। जैसा कि राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड परसा ईस्ट केते बासेन के नाम पर बीते एक दशक से तकरीबन दर्जनों गांवों के शासकीय रिजर्व एवं निजी काश्त के हजारों एकड़ भूमि अधिग्रहण कर लिया है। और तेजी से पांव पसार चुका है। वहीं स्थानीय मूल निवासियों द्वारा अधिग्रहित भूमि जो केंद्रीय सरकार द्वारा जिसे अधिनियमित पांचवी अनुसूचित क्षेत्र घोषित है। जहां ग्राम सभा के बिना कोई भी काम अनुबंधित है। लेकिन औद्योगिक पूंजी निवेश के कारण भोले भाले आदिवासी वर्गों के हितों के लिये यह वर्जित क्षेत्रों में प्रशासन की मिलीभगत से आदिवासियों के लिए निर्मित कानून धाराशाही होते दिख रहा है। सूत्रो की मानें तो यहां पर वनों के कटाई को लेकर आदिवासी मूलनिवासी समुदाय एवं विपक्ष राजनैतिक दल अब प्रशासन के दबाव में आकर डाल डाल और पांत पांत होते दिख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आज जंगल में पेड़ों की कटाई शुरू है । प्रशासनिक अधिकारियों की तथा सैकड़ों पुलिस बल की मौजूदगी में सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को कोल खदान के नाम से काटा जा रहा है। सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र में पेंड्रामार, घाटबर्रा जंगल जाने वाले हर रास्ते पर पुलिस बल तैनात है। किसी को अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है। पेट्रोल से चलने वाली इलेक्ट्रिक आरा मशीन से पेड़ों की कटाई बदस्तूर जारी है। जहां कल तक हरे भरे पेड़ नजर आ रहे थे, वह अब ठूंठ में तब्दील हो गए है और होते जायेंगे। सच कहें तो अगर रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य पुनर्वास तथा अन्य चीजों पर प्रशासन की नजर होती तो क्षेत्रों में स्थिति कुछ और होती। गौर करें खदान खुलने के बाद आज तक इनका विश्वस्तरीय अस्पताल 10 सालों में नही बन पाया। वहीं परसा में इन्होंने कहा था पानी की टंकी बनायेगें परंतु आज तक पानी की टंकी नहीं बना। वहीं प्रबंधन ने बोला गया था कोल प्रभावित के साथ साथ उदयपुर के लोगों को भी नौकरी मिलेगी, परंतु यह भी कुछ लोगों को ही मिल पाया। कई लोगों को तो ऐसी जगह नौकरी मिली की वर्तमान खदान का संचालन लगभग बंद होने लगा तो उन्हें आंदोलन करना पड़ा । लेकिन किसी ने कंपनी से यह नहीं पूछा की जमीन मालिकों को ठेके की कंपनी में नौकरी क्यों दी यदि मूल कंपनी में नौकरी दी होती तो खदान बंद होने की स्थिति में उनको दूसरे जगह चल रहे काम में भेजा जाता परंतु यह भी नहीं हुआ। गौरतलब यहाँ और भी परेशानियां है। अब लोगों को लगता है, केवल प्रकृति ही मालिक है।जाने क्या होगा पता नहीं। इस घटना को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ एल एस उदय सिंह ने कहा कि विकास के नाम आदिवासियों की विनाश का खेल प्रारंभ हो गया है। आखिर सरकार आदिवासियों को मिटाकर इनके के लिए कौन सा विकास करना चाहती है, डॉ उदय ने कहा समझ से परे है। तथा उन्होने कहा है कि विकास के लिए विनाश जरूरी है, लेकिन सरकार बल का प्रयोग न करे। जिससे आदिवासी समुदाय हत्तोत्साहित हो। आज हसदेव अरण्य जंगल सदैव पीढ़ी के लिए मिट गया। जिसके लिये हमें तकलीफ है। अमूमन केंद्र और राज्य सतारूढ़ सरकारों पर यहां के जनता को भरोषा था। लेकिन दोनो सरकारों ने अपने चेहरों पर ऐसा दाग लगा दिया है। कि समाज की कई पीढ़ी कमोवेश आज का दिन को नही भूला पायेगा। उन्होने कहा कि मौत होगा निश्चित है। लेकिन हम जल जंगल और जमीन के लिए लोकहित में संघर्ष जारी रखेंगे।