20 मई के बाद परसा केते कोयला उत्खनन हेतु वनों की कटाई सहित कई अन्य मुद्दों को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी करेगी अनिश्चित कालीन जनांदोलन।

(विशेष संवाददाता द्वारा)

“सरगुजा/ परसा केते/ हरिहरपुर/ GCG NEWS/ 19 मई 2022, सूत्रों की मानें, तो बहुचर्चित राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा परसा ईस्ट केते में कोल ब्लॉक संचालित है।जहां कोयला उत्खनन जारी है। गौरतलब प्रस्तावित हरि हरपुर, परोगिया,घाटबर्रा सहित कई अन्य गांव में नये कोयला उत्खनन के लिए उक्त राजस्थान कोल प्रबंधन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में करीब साढे चार लाख पेड़ो की कटाई की मामला को सुनते ही स्थानीय ग्रामीण भड़क उठे। तथा विरोध पर उतर आए। वहीं ग्रामीणों द्वारा आदानी कोल कंपनी से ग्रीन क्लियरेंस वृक्षों की विदोहन संबंधी कागजात की मांग करते हुए धरने पर बैठे हैं। यहां तक ग्रामीणों की मानें तो संबंधित कंपनी द्वारा रात रात सैकडों वृक्षों को कटाई कर दिया। मसलन स्थानीय प्रभावित आदिवासी समुदाय एक जूट होकर बहरहाल जंगलो की कटाई के  विरोध में अब जल जंगल और जमीन की लड़ाई को तेज कर दिये हैं। बहरहाल यह पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई अब देश में ही नहीं, बल्कि अन्तर्राष्ट्रिय स्तर पर गूंज उठा है।

जैसा कि, यहां प्रस्तावित कोयला उत्खनन के लिए चार लाख से अधिक वृक्षों की कटाई एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की सक्रिय राजनैतिक दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वरसिंह मरकाम ने गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज को एक अनौपचारिक बयान में कहा है, कि देश में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई जिससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ गया है। वहीं क्लोरो फ्लोरो कार्बन उत्पादन जिससे जलवायु परिवर्तन के कारण वैव्श्विक तापमान में वृद्घि हो रही है। ऐसी स्थिति में सता हाँकने वाली सतारूढ़ सरकार आदिवासियो को विस्थापित कर कौन सा विकास करना चाहती है। साफगोई  यह है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के द्वारा आदिवासी इलाका परसा केते में स्थानीय लोगों द्वारा राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से प्रस्तावित कोयला खदान के लिए पेड़ो की कटाई को लेकर जारी आन्दोलन के संदर्भ में जो बातें कहा है, कि विजली चाहिये तो कोयला उत्खनन करना पड़ेगा। जिसको लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अब लामबन्ध है। और पार्टी की ओर से इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियो की जल जंगल और जमीन बचाने के पक्षधर नहीं है। बल्कि उद्योगपतियों को जंगल उजाड़ने में खुली संरक्षण दे रही है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी शीघ्र ही परसा केते कोल उत्खनन के लिये पेड़ो की कटाई के विरोध में परिवहन बंद नहीं, बल्कि पटरी उखाड़ कर फेंकने जैसे आन्दोलन करेंगे। तथा लोकहित में हर चुनौती को स्वीकार करेंगे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ कर दिया है 20 मई को आयोजित जन आंदोलन का हम सम्मान करते हैं। पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पृथक तौर पर शीघ्र इस मुद्दे को लेकर जनांंदोलन करेगी।