अनुसूचित जिला कोरिया के भरतपुर तहसील के हरचोका पंचायत में स्थित मवाई नदी में रेत माफियाओं का अड्डा – ग्रामीण धरने पर बैठे।

FRIDAY, JANUARY 7, 2022 – 18:53

(ए के टेकाम ब्यूरो चीफ भरतपुर तहसील क्षेत्र)
भरतपुर कोरिया/गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज/7 जनवरी 2022 जैसा कि कोरिया जिला के भरतपुर तहसील भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूची से जुड़ा हुआ हल्का है। जहां पांचवी अनुसूची की धारा 244(1) लागू है। ऐसे इलाके में पेसा कानून तथा वन मान्यता कानून सर्वोच्च अहमियत रखता है। यहाँ तक इन इलाकों में न लोकसभा न राज्यसभा सबसे उपर ग्राम सभा का कानून चलता है। तथा सरकार का कोई विशिष्ट कानून भी दखल नहीं दे सकता है।लेकिन दुर्भाग्य है कि सतारुढ सरकार लगातार इन हल्कों में गठित जन जाति सलाह परिषद के बाद भी कानून का धाक दिखा कर मनमानी कर रही है। और आदिवासी क्षेत्रों में रह रहे आदिवासी एवं पंरमपरागत मूल निवासियों का निस्तार एवं उनके सार्वजनिक जल जंगल जमीन और नदी पहाड़ों पर कानून का राज थोप कर औधौगिक कल कारखानों के लिए अनुमति दे रही है। वहीं नदियों की ठेका भी देकर नदी तालाबों की अस्तित्व को खत्म करने में लगी है। सच मानें तो अनुसूचित जिला कोरिया जहां के मध्यप्रदेश के सरहदी से जुड़ा हुआ इलाका तहसील भरतपुर के अंतर्गत बहने वाली सभी नदियों कीमती रेत पर बाहरी माफियाओं का गिद्धदृष्टि लगी हुईं है। जिन क्षेत्रों के भोले भाले आदिवासी समुदाय के स्थानीय कुछ जनप्रतिनिधियों को लालच दिखाकर प्रतिदिन सैकड़ो टंन रेत रातोंरात उठाकर ले जाते हैं। इन दिनों जहां के प्रशासन के नाक के नीचे से तहसील मुख्यालय भरतपुर से सटा हुआ इलाका से बहने वाली नदी मवाई जहां पर दिन दहाड़े बड़ी क्रेन मशीन नदी के बीचों बीच खड़ा कर दादा गिरी के साथ दूसरे राज्यों में उठा कर बड़े बड़े हाईवा से रेत उठा कर ले जाने की शिकायत लगातार भाजपा, आम आदमी पार्टी के साथ ही साथ गांव के समाज सेवियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारियो को ज्ञापन के माध्यम से आये दिन लगातार देते रहते हैं। लेकिन प्रशासन की कुम्भकरनी नींद अब अलबता सता बदलने को है लिहाजा नहीं खुल रही है। कहने को तो प्रशासन अधजगे आला अफसरों का का कहना है कि जहां रेत खोदाई हो रहा है। विधिवत लाईसेंस धारी हैं। लेकिन विडंबना तो तब होती है कि बिना ग्राम पंचायत की अनुमति या प्रस्ताव के बिना रेत उत्खनन की अनुमति कैसे ? इन सवालों के बीच आज स्थानीय जनता का विश्वास कमोबेश सरकार से उठ रही है। जैसा कि बीते चुनावी कार्यकाल में विपक्षी नेताओं द्वारा भरतपुर तहसील के कहीं भी किसी नदी नालों में रेत उत्खनन की कानाफुसी होने पर कान खड़ा हो जाता था। और तिलमिला नदी नालों में धरना का अड्डा स्थल बन जाता था। लेकिन सता की गद्दी मिलते ही आज ऐसी लाख शिकायत के बाद भी कई विपक्षी राजनैतिक दल आज रेत माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही को लेकर नाक रगड़ रहे हैं। वैसे ही धरना-प्रदर्शन चलते रहता है। कार्यवाही के नाम पर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कोई उफ तक नहीं कर रहे हैं। वहीं यहां नदी नालों की कीमती रेत पर गिद्धदृष्टि माफियाओं का हौसला दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। सूत्रों की मानें तो आज स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य क्रमांक 2 के प्रतिनिधि श्रीमती बेलाकली मराबी एवं जिला पंचायत के सदस्य फूलमती नेटी जिनके नेतृत्व में पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरचोका द्वारा बिना अनुमति व ग्राम सभा प्रस्ताव के बिना अवैध रेत खोदाई या परिवहन के विरोध धरने पर बैठे हैं। धरने पर बैठे श्री जयभान सिंह मराबी द्वारा गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज को बताया कि यहां मवाई नदी से जो रेत खोदाई व परिवहन किया जा रहा है। जिस कार्य के लिए सम्बंधित ग्राम पंचायत द्वारा किसी प्रकार से अनुमति नहीं लिया गया है। न ही ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पास हुआ है। यहाँ पर अवैध तरीके रेत की उत्खनन हो रहा है। जिससे यहाँ से गुजरने वाली मवाई नदी की अस्तित्व खतरे में है। तथा पार्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। साथ ही मवेशियों के लिए पानी पीने की संकट उत्पन्न हो गया है। तथा गांव की नदी नाले की सूखने लगी है।इस विषम परिस्थितियों को देखते हुए हम लोकहित धरने पर बैठे हैं। और जब तक यह अवैत उत्खनन बंद नहीं होगा।हम हटेगें नहीं। साथ ही पुरे अंचल के लोग हमारे साथ हैं।