ग्राम दुलहरी में गोंडवाना आंदोलन के जननायक पेनवासी दादा हीरा सिंह मरकाम एवं दादा मोती रावण कंगाली जी की पुण्यतिथि मनाया गया

(अश्विन टेकाम ब्यूरो चीफ द्वारा)

उमरिया /मध्यप्रदेश/ GCG NEWS /1 नवंबर 2021 गोंडवाना समाज के महान जन नायको की पुण्य तिथि गोंडवाना महासभा दुलहरी के तत्वावधान में भूरा सिंह सैयाम की अध्यक्षता में उमरिया जिले के नौरोजाबाद क्षेत्र स्थित ग्राम दुलहरी में 31 अक्टूबर 2021 को गोंडवाना के संस्थापक पेनवासी दादा हीरा सिंह मरकाम जी एवं गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के जननायक कोया पुनेमी गोंडी,धर्म,भाषा संस्कृति के साहित्यकार पेनवासी दादा मोती रावण कंगाली जी की पुण्यतिथि कार्यक्रम कर श्रद्धांजलि दी गई।पुण्यतिथि कार्यक्रम के क्षेत्रीय स्तर के सगाजन कार्यकर्ता धार्मिक,सामाजिक,सास्कृतिक, गोंडवाना के दोनों पुरोधाओं को श्रद्धांजलि देकर उनके मिशन के विचार बताएं। अतिथि प्रमुखों ने कहा दादाओं के दादा दादा हीरा सिंह मरकाम का रुझान राजनीति की तरफ था तो दादा मोतीरावण कंगाली धर्म संस्कृति को स्थापित करने में लगे थे। दोनों एक-दूसरे के करीब आए और मिलकर संघर्ष को आगे बढ़ाया। राजनीति में हीरा सिंह मरकाम सफल हो चुके थे और संयुक्त मध्य प्रदेश के पाली तानाखार सीट से 1985-86 में भाजपा के टिकट से चुनाव लड़े और पहली बार मध्यप्रदेश विधान सभा में पहुंचे। हीरा सिंह मरकाम एक प्राइमरी स्कूल के शिक्षक से विधायक बने थे और काफी प्रसिद्धि भी पा चुके थे। दूसरी ओर मोतीरावण कंगाली कोइतूरों के इतिहास, भाषा, संस्कृति और धर्म को समझने में लगे हुए थे। वे तब उतने लोकप्रिय नहीं थे। बाद में हीरा सिंह मरकाम ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की नीव डाली और मोतीरावण कंगाली ने परदे के पीछे से उन्हें सहयोग दिया। वे सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना को जाग्रत करने का कार्य कर रहे थे। मोतीरावण कंगाली चूंकि सरकारी नौकरी में थे इसलिए राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं हो सकते थे। लेकिन दोनों में एक आपसी समझ बन चुकी थी कि बिना धर्म-संस्कृति के सामाजिक चेतना नहीं आएगी और बिना सामाजिक चेतना व एकता के राजनैतिक चुनाव जीता नहीं जा सकेगा। धीरे-धीरे मोतीरावण कंगाली और हीरा सिंह मरकाम एक-दूसरे के पूरक बन गए। उनके साझा प्रयास से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सोए हुआ गोंडवाना आंदोलन का पुनर्जागरण हो गया । इसके लिए दोनों ने मिलकर कार्य किया और दोनों के काम करने के ढंग को देखकर लोगों को एक नए युग का अहसास हुआ। उनके अंदर उम्मीदें जगीं। लोगों को लगने लगा कि अब उनकी अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई फिर से लड़ी जा सकेगी और वे भी एक सम्मानित नागरिक की तरह इस देश में जी सकेंगे।इस कार्यक्रम में विशेष रूप से मुख्यअतिथि तिरु.माधव सिंह धुर्वे जी-अध्यक्ष ब्लॉक इकाई कोयतोड़ गोंडवाना महासभा,कमलभान धुर्वे-अध्यक्ष युवा आदिवासी संगठन उमरिया,ईश्वर उइके जी-प्रवक्ता युवा आदिवासी संगठन उमरिया,पंचम सिंह परस्ते-सरपंच दुलहरी, भूपत सिंह परस्ते-युवा सामाजिक कार्यकर्ता मरदरी, अश्विन तेकाम-गोंडवाना उदय न्यूज ब्यूरो चीफ उमरिया,राजेन्द्र सिंह परस्ते-अध्यक्ष युवा आदिवासी युवा आदिवासी संगठन दुलहरी,लक्ष्मण मरावी- सचिव युवा आदिवासी संगठन उमरिया,ओमप्रकाश मसराम- सहसचिव युवा आदिवासी संगठन उमरिया,पुरुषोत्तम परस्ते-वरिष्ठ समाजसेवी दुलहरी, जयलाल सिंह-वरिष्ठ समाजसेवी दुलहरी, भूपेंद्र मसराम-जीएसयू अध्यक्ष उमरिया, दुर्जन सिंह-युवा समाज सेवी दुलहरी, नरेश मरावी-युवा समाज सेवी दुलहरी, कैलाश कुलस्ते-युवा समाजसेवी दुलहरी, दीपक आर्मो-युवा समाज सेवी दुलहरी, इंद्रपाल आर्मो-वरिष्ठ समाजसेवी,लखन बड़करे-वरिष्ठ समाज सेवी कछारी एवं समस्त ग्रामवासी उपस्थित थे।