शब ए बारात को गुनाहों से बख्शिश व रोजी रोटी का इंतजाम करता है खुदा।
(बृजेश गोंड ब्यूरो चीफ देवरिया)
(GCG NEWS)
देवरिया जिला भाटपाररानी । इस्लामी महीने शाबान की14 वी तारीख की रात मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले पर्व शब ए बारात गुनाहों से बख्शिश व निजात पाने की रात है।यह हजारो रातो से बेहतर है।इस रात को सच्चे दिल से मांगी गई हर एक दुआएं खुदा कबूल फरमाता है यही वजह है कि मुस्लिम बिरादरी के लोग इस रात को खुदा के इबादत मे गुजारते हुएअपने व अपनी पूर्वजो कि बख्शिश व मगफिरत के लिए दुआएं करते है।इस मौके पर मस्जिद व कब्रिस्तानो को खुबसूरत ढंग से सजाया जाता है और हलवा पकाकर फातिहा भी पढी जाती है शब ए बारात दो शब्दों शब+बारात से मिलकर बना है शब का अर्थ होता है रात जबकि बरात का अर्थ होता है खुशी यानि गुनाहो से माफी दिलाने वाली खुशियों की रात। इस बाबत भाटपाररानी तहसील क्षेत्र के भोपतपुरा निवासी इस्लामी विद्वान मौलाना महमूद आलम कादरी तथा करौदी गांव निवासी मौलाना सिद्दीक अजीजी ने बताया कि शब ए बारात की रात काफी अहमियत फजीलत बरकत व रहमत भरी रात है।इस रात को रहमत के फरिस्ते आसमान से जमीन पर उतर जाते है कि कौन सा बंदा क्या कर रहा है अगर इस रात को बंदा अपनी इबादत के जरिए खुदा के राजी कर ले तो उस पर साल भर तक खुदा के रहमते बरसती है हदीस शरीफ के मुताबिक इस रात को खुदा खुद फरमाता है कि जिस बंदे को जो कुछ मांगना हो मुझसे मांग ले।इस रात को मांगी गई हर एक दुआए खुदा कुबूल फरमाता है। और अपने बंदो को रोजी रोटी का बजट सहीत तमाम कार्य योजनाएं भी तैयार करता है।अपनी गुनाहो से तौबा करते हुए आइंदा गुनाह न करने का वादा करे तो खुदा उस बंदे के साल भर आगे व पीच्छे कि गुनाह माफ कर देता है।पैगम्बर मुहम्मद सल्ल ० मक्का स्थित जन्नतुलबकी नामक कब्रिस्तान जाकर वहा दफनाए गए लोगो कि मगफिरत केसाथ साथ जिंदा लोगो की भलाई व सलामती की दुआएं किया करते थे लिहाजा हमे चाहिए कि इस बेसकिमती रात को कुरान की तिलावत नफीस नमाज दरुद व कलमा जैसी इबारतो मे गुजारते हुए अपने व पूर्वजो को गुनाहो से माफी व समाज मुल्क मे अमन सलामती के लिए खुदा से दुआएं करे।