
(विशेष संवाददाता द्वारा)
सरगुजा छत्तीसगढ़ / GCG NEWS/ 20 मई 2020 उदयपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत स्थित राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा हसदेव अरण्य वन में प्रस्तावित कोयला उत्खनन के लिये साढे चार लाख पेड़ो की विदोहन कटाई के विरोध में चल रहे आंदोलन की गति आज तेज हो गया है।छत्तीसगढ़ के तेज तर्रार आदिवासी नेता तथा पूर्व सांसद श्री सोहन पोटाई अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में हजारों की संख्या में आयोजित सरगुजा बंद के ऐलान पर लोग परसा केते पहुंच कर आंदोलन को समर्थन दिया। तथा एन एच 130 पर चक्काजाम कर दिया,वहीं परसा ईस्ट केते खदान से कोयला ले जाने वाले रेल्वे ट्रेक को भी बाधित कर दिया है। हालांकि प्रशासन ने एन एच से गुजरने वाले वाहनों का मार्ग परिवर्तित कर दिया है।लेकिन पंक्तियाें के लिखे जाने तक हजारों की संख्या में प्रदेश भर से पहुंचे आदिवासी सड़क पर डटे हुए हैं,खबर है कि, देर शाम के पहले आदिवासी सड़क से नही हटेंगे। सर्व आदिवासी समाज के इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं की संख्या सर्वाधिक है। आन्दोलन के दौरान कहा गया है कि पेेेेड़ो की कटाई नही रोका गया तो प्रदेश भर में आदिवासी सड़कों पर उतरेंगे।
सर्व आदिवासी समाज अपने पत्र में मुख्यमंत्री बघेल को संबोधित कर कहा गया है कि, खनन प्रस्ताव अनुमति मे बहुत सारी वैधानिक खामियां हैं। पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में आने वाले सरगुजा में किसी भी काम के लिए ग्राम सभा की अनुमति जरूरी है,लेकिन किसी भी ग्राम सभा से अनुमति नही ली गई है,बल्कि फर्जी ग्राम सभा कराने की कवायद प्रशासन ने की है। सर्व आदिवासी समाज की ओर से उल्लेख किया गया है कि, आदिवासियाें में टोटम प्रणाली होती है,जो पौधे जीवित एवं स्थान पर आधारित होते हैं,पेन देव देवी जो आदिवासी पूर्वज हैं,वे उस भूमि की विशिष्ट स्थानाें पर निवास करते हैं,उन्हे किसी दूसरी भूमि मेंं स्थानांतरित नही कर सकते। विस्थापन का मतलब है कि,आदिवासियाें के दृढ प्राकृतिक आस्था प्रणाली का विनाश होगा।
इस पत्र में चेतावनी दी गई है कि, परसा कोल ब्लॉक उत्खनन की अनुमति को निरस्त और परसा ईस्ट बासेन में कोयला खनन को तत्काल बंद यदि नही किया गया तो पूरे प्रदेश में सर्व आदिवासी समाज उग्र आंदोलन करेगा। गौरतलब परसा में कोल उत्खनन के खिलाफ बीते दस वर्षाें से आंदोलन जारी है। हसदेव अरण्य को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन को राहुल गांधी तब मदनपुर पहुंचकर समर्थन दे चुके हैं। जबकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नही थी, तब राहुल गांधी ने यह आश्वस्त किया था कि, यदि कांग्रेस सरकार बनी तो आपको जंगल जमीन से नही हटाया जाएगा। लेकिन परसा कोल ब्लॉक उत्खनन की अनुमति और परसा ईस्ट बासेन में कोयला खनन के एक्सटेंशन को अनुमति तब दी गई है जबकि प्रदेश में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार है। हसदेव अरण्य को लेकर आंदोलन अब व्यापक होने लगा है, सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले हजाराें आदिवासियाें की उपस्थिति तो आज नुमाया हुई है, लेकिन हसदेव बचाओ के नाम से साेशल मीडिया पर जबर्दस्त ट्रेंड चल रहा है,हसदेव बचाओ अभियान के समर्थन में ना केवल देश बल्कि विदेशाें से भी लोगों ने समर्थन दिया है।
सीएम बघेल की दो टूक − देश को कोयला चाहिए लेकिन नियमों का उल्लंघन नही होना चाहिए
हसदेव अरण्य को लेकर तमाम विरोध के बीच सीएम भूपेश बघेल की इस मामले में जो टेक है,वो संकेत देती है कि, राज्य सरकार उत्खनन नही रोकेगी,हालांकि वह यह सुनिश्चित करेगी कि, कानून और नियमों का उल्लंघन ना हो। मुख्यमंत्री बघेल ने रायपुर हैलीपेड पर पत्रकारों से चर्चा में 18 मई को कहा है कि कोयला वहीं है, जहां पहाड़ और जंगल है,जंगलाें को बचाने के लिए नीतियां बनी है। जिसे वन विभाग उसे देखते हैं,उसके लिए वन अधिनियम है,पर्यावरण कानून है। उन नियमों का उल्लंघन नही होना चाहिए,प्रभावित लोगों को मुआवजा बराबर मिलना चाहिए।देश को बिजली चाहिए तो तो काेयले की जरूरत तो पड़ेगी,आज कोयले के लिए पैसेंजर ट्रेन को खुद भारत सरकार रोक रही है।कोयला निकलेगा तो वहीं से जहां खदान है, लेकिन इसके लिए जो नियम है उसका पालन होना चाहिए,उसमें कोताही नही होनी चाहिए। लेकिन 130 कोल ब्लॉक घने जंगलों से बाहर है।
सीएम बघेल के बयान के विपरीत हसदेव अरण्य आंदोलनकारी और पर्यावरण के लिए संघर्षरत लोग यह दावा करते हैं कि,प्रदेश के 180 कोल ब्लॉक में कोयला भंडारण 58000 मिलियन टन है। इनमें से 130 कोल ब्लॉक जंगलों से बाहर हैं,जिस हसदेव अरण्य में खनन को लेकर विरोध में आदिवासी हैं,और दूसरी तरफ सरकार है वहां केवल पांच हजार टन कोयला भंडार है।इस दावे के साथ ही यह सवाल भी किया जा रहा है कि,जब यह स्थिति है तो हाथियाें के घर और मध्य भारत के फेफड़े के रूप में पहचाने जाने वाले हसदेव के घने जंगलों को जिसे भारतीय वन्य जीव संस्थान ने जैव विविधता से समृद्ध परिपूर्ण वन क्षेत्र माना है। जिसमें स्पेशिज वन कैटेगरी के जानवरों की रिहाईश है,उसे लेकर ही सरकार उत्खनन की जिद पर क्याें है।
बहरहाल यह इलाका में पांचवी अनुसूची की अनुच्छेद 244(1) लागू है। जहां सच मानें तो मंत्री मंडल की कोई विशिष्ट कानून लागू नहीं होता। जहां राज्यपाल सर्वोच्च है। तथा जन जाति सलाहकार परिषद को अधिकार प्रदत है।