कोरिया जिले के पटना में बहुचर्चित आवासीय परिसर में लोहे के चादर को पीट-कूट कर कोलाहल व प्रदूषण पैदा करने पर मामला निचले राजस्व न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा,कोई सुनवाई नहीं, अब लोगों में आक्रोश।

(कृष्ण कुमार कोराम ब्यूरो चीफ कोरिया)

कोरिया/छत्तीसगढ़/ GCG NEWS/1फरवरी 2022, यूं कहें तो, कोरिया जिला पांचवी अनुसूचित क्षेत्र है, जहाँ पर भारतीय सविंधान की अनुच्छेद 244(1) लागू है, इन हल्कों में बिना ग्राम सभा के बिना कोई एक इंच जमीन भी नहीं खरीद सकता है। बसना तो दूर की बात है। पर यहां के भोले भाले आदिवासी जनता जिनके अज्ञानता के कारण जो अपने मौलिक अधिकारो से कट रहे हैं। यही बात आज यहां के मूल वासिंदो को चूभ रहा है। और इन इलाकों में मनमर्जी से लोग अपने प्रभाव व पहुंच के कारण आदिवासी सामुदायिक क्षेत्रों के रिहायसी इलाकों में छोटे बड़े फैक्ट्रियों की बाढ़ आ गई है। नियम और कानूनों को ताक पर रखकर जहां पा रहे हैं औद्योगिक केंद्र बना रहे हैं।

ऐसे ही एक मामला कोरिया जिले के पटना तहसील कार्यालय मुख्यालय क्षेत्र के पांडवपारा मार्ग में एक व्यक्ति द्वारा सरे आम आवासीय परिसर में बिना किसी औद्योगिक व्यपवर्तन कराये धड़ल्ले से बिना परमिशन के अवैध रुप से फेब्रि केशन फैक्ट्री जिसजिसमें लोहे की चादरों को पीट पीट कर छड़ आल्मारी लोहे की खिड़की शटर ग्रिल विद्युत मोटर प्रेस मशीन लगा कर ध्वनि प्रदूषण करने की मामला प्रकाश में आया है।

जिस संबंध में एक व्यक्ति जो पीड़ित है, निवासी ग्राम पटना शकील आ नूरहसन जिनके ओर से राजस्व अनुविभागीय दंडाधिकारी बैंकुण्ठपुर स्थित कार्यालय में प्रदूषण और कोलाहल को लेकर एक केस दर्ज कराया था। जिस संबंध में उक्त न्यायालय द्वारा स्थानीय राजस्व न्यायालय नायब तहसीलदार पटना को वि दा प्र क्रमांक 01/2019 अन्तर्गत धारा 133 दं प्र संहिता के तहत दिनांक 25/9/2019 को इस संबंध में दा प्र सं 1973 के धारा 133की उपधारा 1(ख) के तहत  24 फरवरी 2019 को आवासीय परिसर से अन्यत्र कारोबार करने का एक आदेश स्थानीय पुलिस थाना के मार्फत जारी किया गया था। जिस आदेश का पालन तो दूर उक्त प्रदूषण फैलाने का जिस पर आरोप लगा है अपना करोबार को दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि कर दिया है।  यह बहुचर्चित मामला क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल अंबिकापुर से लेकर संचानालय, पत्र क्र 3050,27 मार्च 2019 नगरीय निकाय इन्द्रावती भवन अटल नगर रायपुर तक गूंज उठी। इसके बावजूद भी प्रशासन आंख मूंद लिया है। यहाँ तक न्याय पाने के लिए पीड़ित की ओर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में भी करोबार को हटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिए, लेकिन कारोबारी पर तनिक भी आंच नहीं आया है। लोगों का कहना है कि अब सीमेंट का व्यवसाय भी प्रारंभ करने से जिसका डस्ट से यहां लोगो का जीना वेहद मुश्किल हो चुका है। इस विषय में सबंधित कारोबारी से हमारी न्यूज टीम वास्तविकता को जानने के लिए संपर्क करने की कोशिस किया, पर नहीं हो सका। बहरहाल  सामाचार की सत्यता पीड़ितो के पक्ष पर आधारित है। सच मानें तो द्वितीय पक्ष का बयान भी एक अहम् मायने है।