18 दिसंबर को परसा केते कोल ग्रुप द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में वनीकरण के नाम पर चार हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी करेगी खड़गवां तहसील में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन
18 दिसंबर को परसा केते कोल ग्रुप द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में वनीकरण के नाम पर चार हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी करेगी खड़गवां तहसील में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन
जानकारी के मुताबिक कोरिया जिला जो भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र से परिभाषित है, जैसा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1997 में आदिवासियों के पक्ष में दिया गया फैसला जो 20 वीं शताब्दी का अद्भूत एवं ऐतिहासिक फैसला है। जिस निर्णय में कहा गया है, कि संपूर्ण भूमि जो आदिवासी एवं उनके पूर्वजों का है, जिसका गैर उपनिवेशों द्वारा दुरुपयोग किया गया है, उस भूमि को पुन: उनको वापिस कर दिया जाना चाहिए। इस फैसले ने पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में एक जान फूंक दी है।
कहने का तात्पर्य है, कि आदिवासियों की जमीन सिर्फ आदिवासियों के लिए है। जिनमें कोई अन्य वर्ग का व्यक्ति या फिर किसी अन्य औधोगिक उपनिवेशो द्वारा हस्ताक्षेप नहीं कर सकता। संविधान की पांचवी अनुसूची के तहत पैरा 5 (2) में शांति और प्रबंधन के साथ ही साथ आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासियों को छोड़ कर अन्य किसी व्यक्तियों को आदिवासियों की अचल संपत्ति की हस्तांतरण पर संपूर्ण रोक है। ऐसी शसक्त कानून के बाद भी तहसील खड़गवां स्थित 16 ग्राम पंचायतों की भूमि को राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन लिमिटेड द्वारा सरगुजा जिला स्थित परसा कोल ब्लॉक जिस में खनन का ठेका अडानी समूह के पास है। इस कोल ब्लॉक हेतु 841 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्सन हुआ है। और इस वन भूमि का क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए कोरिया जिले के खड़गवां तहसील स्थित 1684,66 हेक्टेयर जमीन को व्यपवर्तित किया गया है। यह प्रक्रिया को ग्रामसभा अनुमति के बिना की गई है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि खड़गवां जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीओ) द्वारा प्रभावित ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों को अपने दफ्तर में बुलाकर फर्जी तौर पर ग्रामसभा के प्रस्ताव रजिस्टर में दबाव पूूर्वक हस्ताक्षर करवायेे जाने का शिकायत है। वहीं ग्रामसभा की प्रक्रिया को पूर्ण करवाया है। इस प्रकार के कृत्य की जानकारी मिलते ही गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ एल एस उदय ने ऐसी कृत्य की घोर भर्त्त्सना की है। तथा पार्टी महामंत्री ने कहा है कि यह क्षेत्र पांचवी अनुसूचित क्षेत्र जो सविंधान की अनुच्छेद 244 (1) के तहत एक निजी स्वायतता है।
जिस क्षेत्र के संरक्षक राज्यपाल और राष्ट्रपति जहां पर मंत्री मंडल का कोई विशिष्ट कानून लागू नहीं हो सकता। जहां की भूमि अधिग्रहण की सर्वोच्च अधिकार किसी और को नहीं, बल्कि ग्रामसभा को है। ऐसी स्थिति में किसी लोक सेवक द्वारा दबाव पूूर्वक स्थानीय ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों को आदिवासियों की पीढ़ी से काबिज भूमि को एक कंपनी के पक्ष में देने के लिये उतावले जनपद पंचायत खड़गवां के इस कारनामे की निंदा करते हुए पार्टी की ओर से कहा है कि जनपद सीओ द्वारा कथित तौर पर फर्जी ग्रामसभा रजिस्टर में सरपंच एवं सचिवों का हस्ताक्षर करवाया है। वेहद निंदनीय है। उन्होँने कहा है यदि सच है तो प्रशासन निष्पक्ष रूप से जांच कर शीघ्र अजा/जजा अत्याचार प्रताड़ना शंसोधित अधिनियम 2016 के तहत मामला पंजीबद्ध करे। अनुसूचित क्षेत्रों में वन मान्यता कानून 2006 के नियमों के विपरित कृत्य है। उन्होनें कहा इन इलाकों में गैर वर्गो बढ़ती भीड़ आज आदिवासियों की रूढ़ि जन्य प्रथा पारंपरा को प्रभावित कर रहा है। वहीं इन वर्गो की भूमि प्रतिबंध के बाद भी मरे गिद्ध की भांति मुख्य सडक मार्गों के किनारे कीमती भूमि को बाहरी लोग झपट रहे हैं। जैसे कि धनपुर में शासकीय निस्तार भूमि में अवैध कब्जा तथा बोड़ेमुड़ा में एक विहारी जो फटाबोरा बेचने वाला प्रतिबंध के बाद भी आदिवासी की जमीन में मकान बना लिया है। दूसरा एक अनाधिकृत रुपएक गैर बाहरी व्यक्ति द्वारा एक गरीब बैगा आदिवासी कवलपति की पैतृक शासकीय कब्जा भूमि में प्रतिबंध के बाद भी दबंगई के साथ पक्का मकान बना लिया गया है। वहीं रतनपुर में गैर प्रांतीय प्रभावशील एक कोलरी रिटायर व्यक्ति द्वारा बैगा जनजातियों की शासकीय निस्तार भूमि मे अवैध तरीके से कब्जा कर मकान दूकान का संचालन कर रहा है। वहीं एक बिहार प्रांतीय व्यक्ति द्वारा आदिवासी भूमि में वैनामा तरीके से हड़प कर मकान बना रहा है। साथ ही साथ ग्राम पंचायत तामडांड मोड़ मे भी आदिवासी की भूमि प्रतिबंध के बाद भी 100 साल का नियमो के विरुद्ध लीज बनवा लिया है।और आदिवासी सदस्य को अपने पक्ष में काबूलवाने के लिए बंधक रखने की शिकायत है। वहीं एक व्यक्ति द्वारा आदिवासी प्रतिबंधित भूमि को आदिवासी के नाम पर छलपूर्वक अंतरित कर मकान बना लिया है। इस प्रकार से अनुसूचित अंचलो में गैर तरीके से भूमि हड़पने वाले लोगों के विरूध तत्काल लोकहित में शासकीय निस्तार एवं आदिवासियों की भूमि से कब्जा हटाने की कार्यवाही किया जावे। उन्होँने कहा है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा समय सीमा में प्रशासन द्वारा अवैध कब्जाधारियों को नहीं हटाया गया। तो हमारी पार्टी 18 दिसम्बर 2021 को अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दिया है।