सूरजपुर जिले के रामानुजनगर क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक द्वारा आदिवासी बच्चों के साथ पढ़ाई के नाम पर कथित भेदभाव, जानबूझकर रहता है नदारत, प्रधानपाठक का नाम तक नहीं जानते बच्चे, पालको में आक्रोश, किया हटाने की मांग ।
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक द्वारा आदिवासी बच्चों के साथ पढ़ाई के नाम पर कथित भेदभाव, जानबूझकर रहता है नदारत, प्रधानपाठक का नाम तक नहीं जानते बच्चे, पालको में आक्रोश, किया हटाने की मांग ।
(संभाग ब्यूरो चीफ सी. पी.सिंह मरावी)
सूरजपुर छत्तीसगढ/GCG NEWS/ 9अक्टूबर 2021 छत्तीसगढ़ राज्य के उतरी सरहदी क्षेत्र जो संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है,जहां अनुच्छेद 244(1) लागू है।बहरहाल इन इलाकों में इन वर्गों की शैक्षणिक संस्थाओं इन वर्गो की शिक्षा की स्तर को संवारना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। लेकिन ऐसे इलाको में पदस्थ कुछ ऐसे कर्मचारी हैं,जो इन वर्गों से आंतरिक तौर पर भेदभाव रखते हैं,लिहाजा इन वर्गों की मूल विकास की जड़ शिक्षा है। जिस नींव को जानबूझकर कर शिक्षा के मंदिर में कुछ अन्य वर्ग के शिक्षकोँ द्वारा हिलाया जा रहा है। जिन बच्चों का भविष्य संवरने के जगह भरभराते दिख रहा है। जहां के बच्चे पुस्तक की बात तो दूर, दुर्भाग्य है कि अपने प्रधानपाठक जिस पर स्कूल प्रबंधन की सारी जिम्मेदारी होती है जिनका नाम तक नही जानते। स्थानीय एवं बच्चों एवं पालक वर्गो का कहना है कि प्राथमिक विद्यालय पस्ता में पदस्थ प्रधानपाठक महिनो में 6-7 दिन विद्यालय आते हैं। और अनुपस्थित दिन का भी अपनी उपस्थिती में अपना पेन चला देते हैं। और उपस्थिति रजिस्टर को ताला बंद कर निकल लेते हैं।जो उनके आदत में शुमार हो गया है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर पालक एवं स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने जिला शिक्षा अधिकारी,जिला कलेक्टर तथा स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री रेणुकासिंह को भी जन शिकायत की है।देखना तो तय है कि क्या कार्यवाही होता है।यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुआ तो हम अपने बच्चोंं का भविष्य ऐसे शिक्षको हाथों नही बिगड़ने देंगे।अंतिम विकल्प जन आंदोलन होगा।
फिलहाल यह क्षेत्र विकास खंड शिक्षा अधिकारी रामानुजनगर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत पस्ता के जूनापारा का प्राथमिक पाठशाला का है। इन दिनों लंबे समय से प्राथमिक पाठ शाला पस्ता जूनापारा में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ दिनेश कुमार दुबे हैं। जिनके द्वारा लगातार विधालय में बार बार अनुपस्थित पाया गया। जिसमें से महत्वपूर्ण दिन हाल ही में 30 अक्टूबर ,8 नवम्बर को पालक संघ द्वारा विद्यालय में जाकर वहाँ के बच्चों से लिये जानकारी के अनुसार की बताया गया कि प्रधानपाठक हमेशा विद्यालय में अनुपस्थित रहते हैं। जिसका परिणाम है, कि यहां तक स्कूल के बच्चों को उनके प्रधान पाठक तक का नाम नाम पुछने पर नहीं बता सके। जहां की पढ़ाई उपर के भरोसे चल रहा था , गौरतलब है कि महीने में 5 -6 दिन ही स्कूल आते हैं,ऐसे में हमारे देश के भविष्य का निर्माता कहलाने वाले इन बच्चों का पूरा जीवन अन्धकारमय कर रहे हैंं। कुल मिलाकर इसे विडंबना कहें या दुर्भाग्य का खेल। इस पर पंचायत के सभी प्रतिनिधियों ने गंभीरता पूर्वक विचार व्यक्त करते हुए कहा, कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश एवम् सूचना के आधार पर ऐसे कर्मचारी के ऊपर कड़ी कार्यवाही करते हुए, तत्काल प्रभाव से यहां से हटाया जाए,और किसी दूसरे को पदस्थ करवाया जाए।
इस विषय पर सर्वप्रथम आवेदन
जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर,
मा. कलेक्टर जिला सूरजपुर,
सहायक आयुक्त आ.जा. क.विभाग सूरजपुर,केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार नई दिल्ली,विधायक प्रेमनगर सूरजपुर के नाम पर स्थानीय सरपंच श्री मनोज कुमार सिंह ,उपसरपंच श्री पूरनराम प्रजापति ,पूर्व सरपंच प्रतिनिधि श्री विश्वनाथ सिंह , दिराज कुमार प्रजापति, नंदू राम राजवाड़े, सोनेलाल राजवाड़े,नंदा राम राजवाड़े ,नंदलाल प्रजापति डी. पी. एस.मरकाम ,ओमप्रकाश सिंह, दियो सिंह, जितराय प्रजापति,योगेश कुमार,नाहर सिंह,भोलाराम राजवाड़े,अरविंद राजवाड़े ,प्रदीप, तीरथ सिंह,तुलकेश्वर,रामकुमार, अदल सिंह,सुखसाय, नारायन राम राजवाड़े,इस प्रकार भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित होकर आवेदन दिया गया है।