13 अरब साल पहले शौर्य मंडल की उत्पति से लेकर, सिंधु घाटी सभ्यता कोट,गढ़ व्यवस्था, वर्तमान धर्म संस्कृति के बारे में चिकित्सा अधिकारी, शोधकर्त्ता डॉ नार्वेन कसाव टेकाम की व्याख्यान को सारा समाज ने सराहा।
कोरिया छत्तीसगढ (GCG NEWS) मध्य गोंडवाना क्षेत्र के छत्तीसगढ़ राज्य के उतरी सरहदी कोरिया जो तत्कालीन रियासत खड़गवां जमींदारी के ऐतिहासिक गढ़ कोरियाहिल के गोद में बसा हुआ गढ़तर ग्राम पंचायत हैं। जहां पर बीते दिन 7 फरवरी को कोया पुनेंम सांस्कृतिक व आर्थिक समृद्धि को लेकर एक वृहद कार्यक्रम आयोजित किया गया थ। उक्त कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्ध सामाजिक शोधकर्त्ता एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ नार्वेन कसाव टेकाम जिन्होंने संसार की उत्पति से लेकर वर्तमान जीवन पद्धतियों के बारे में आंचलिक भाषा बोली से आयोजित कार्यक्रम में आये हजारों लोगों को डॉ टेकाम ने 13.7 अरब पूर्व खगोलीय परमाणु विस्फोट से शौर्य मंडल की उत्पति से लेकर 4.60 अरब साल पहले धरती की अनुकूलन जीव जन्तुओं की उत्पति की बारीकियों को पटल पर लिखकर समझाया। जहाँ वैज्ञानिक नाम होमोसेपियंस का अस्तित्व जिससे विवेकी जीव और सहज जीवों की जिनमें बुद्धि विकसित हुआ। 6 हजार साल पहले पाषण युग के प्रारंभिक काल के बाद 2584 साल पहले भगवान बौध कपिल वस्तु नेपाल, 1500 ईसा पूर्व 3521 ऋचा रिक वेद,वहीं उतर वैदिक 1500 साल पहले,2500 साल बाल्मीकि रामायण 200साल पहले रामायण 1632 मे पुष्य मित्र साकेत जिसे आज आयोध्या नाम दिया गया। कबीर साहब 623साल पहले कबीर पंथ की उत्पति हुई। गुरु ग्रंथ साहब 562 साल पहले वहीं गुरु घासी सतनाम पंथ तथा 540 वर्ष पहले स्वामी महाबीर वर्धमान में कृष्णा देव सिद्धार्थ नाम से 540 साल पहले का है। उन्होनें कहा सच तो यह है कि गुप्त काल 500 साल पहले देव नगरी लिपी क,ख ग का लिपी था ही नहीं,फिर कुछ ग्रंथ में दावा करते हैं कि सूर्य को बानर निगल गया। मुख,भुजा,उदर पैर से क्षुद्र की उत्पति आज कल्पना से परे है। लाखों साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता और संस्कृति मोहन जोदडो हड़प्पा जो आदिवासियों की विकसित संस्कृति जो आज भी सदाचार से भरापूरा,कोया पुनेंम जो सत्य का मार्ग कुदरत की गति के मुताबिक संचालित होते हैं। जो कुदरती मार्ग में झूठ नहीं बोलते। जो वर्तमान में प्राकृतिक शक्ति पर भरोषा करते हैं। आज का धर्म व्यवस्था कल्पनातीत झूठ को छुपाने जैसे कृत्य है। पर आदिवासी प्राकृतिक कुदरत के मुताबिक धर्म पर विश्वास नहीं करते बल्कि कोया पुनेंमी संरचना पर विश्वास करते आये हैं। एक विद्वान एल पी शर्मा के अनुसार आर्य उतरी अमेरिका के अन्टोनिया, विसोपोटामिया के संस्कृति को मिटाते हुये सिंधु घाटी सभ्यता और संस्कृति को नष्ट किया गया। आदिवासियो के पूर्वजों के साथ देवासुर संग्राम के नाम पर युद्ध किये। जो अपने को देवता और मूल निवासियों को राक्षस बता कर घृणा पैदा कर दिया गया है।जो आज भी जारी है। उनके आर्य विवाह में लड़की लड़का खोजते हैं। और मूल निवासियों में लड़का पक्ष लडकी। उनकी संस्कृति अलग है। जैसा कि इंद्र अपने गुरु माता के साथ क्या किया था कोई नई बात नहीं है।और झुठ छिपाने के लिए धर्म बनाया गया। तथा हिटलर के मुताबिक सौ,बार झूठ को बोलते रहोगे तो सच में बदल जाता है।और आज सुबह से शाम तक टी वी,रेडियो में देख और सुन रहे हो। जिसका सजा है कि आज अपने गौरवमयी भाषा संस्कृति से दूर हो रहे हो। जिससे अपने राज पाठ से भी दूर होते जा रहे हो।