
केंद्र की भाजपा सतारुढ सरकार की ओर से देश में आर्थिक सुधारों व तरक्की के नाम पर बजट पेश कर खुद की पीठ थपथपा कर खुश हो रही है।जिसमें कृषि एवं स्वास्थ्य के अलावा राष्ट्रहित के लिए अहम मायने रखने वाले श्रमबीरो तथा देश के मूल आधारस्तंभ आदिवासियो के लिये बजट में आर्थिक समृद्धि के नाम पर गहरी खंदक खोदने जैसे है। जिनके लिए पृथक से सवैधानिक पांचवी और छठवीं अनुसूची निहित है। इनके आर्थिक विकास व स्वावलंबन के लिए कोई जगह नहीं है।