गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती की शौर्य एवं बलिदान दिवस के अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा आदिवासियों की सवैधानिक हित संवर्धन को लेकर राष्ट्रपति को सौपा ज्ञापन

खड़गवां/कोरिया /GCG NEWS/ 24 जून 2021, जिले के दक्षिणी इलाका खड़गवां जो पूर्व गोंड जमींदारी ऐतिहासिक जगह है, जहां पर  तहसील मुख्यालय व अनुविभागीय कार्यालय है।चूंकि यह क्षेत्र आजादी के बाद तथा संविधान निर्माण के पूर्व जहां पर पांचवी अनुसूची की अनुच्छेद   244(1) के तहत कानूूून लागू होता है। जहाँ अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए गवर्नमेंट आफ इंडिया GOI act 1935 की कानून व्यवस्था TRIBAL area में आज भी कायम है। crown की अनुमति आवश्यक है। कानून की मानें तो, रामकृपालभगत विरुद्ध बिहार सरकार  के मामले में सुप्रीम कोर्ट का 9 बेंच का वेदांता जजमेंट के आधार पर पांचवी अनुसूचित क्षेत्रो में जाहिर तौर के इन इलाकों में सामान्य कानून भी लागू नहीं हो सकता। वहीं IPC एवं CRPC जैसे कानून भी वैध नहीं है। उक्त पांचवी अनुसूचित क्षेत्रो में मिले संवैधानिक स्वायत्तता को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ एल एस उदय ने राष्ट्रपति के नाम पर स्थानीय कार्यपालिक दण्डाधिकारी खड़गवां को अपने पार्टी कार्यकर्त्ताओं से मिलकर ज्ञापन सौंपा। तथा उन्होनें प्रेस वार्ता के दौरान कहा है कि पांचवी अनुसूचित आदिवासी क्षेत्रों में सामान्य कानून जो असंवैधानिक है। पार्टी राष्ट्रीय महामंत्री डॉ एल एस उदय ने आदिवासी इलाकों में ऐसे कानून को राष्ट्रपति से मांग किया है, कि इस कानून को संशोधित किया जाये तथा पांचवी अनुसूचित 244(1)जैसे आदिवासी इलाकों मे सामान्य कानून लागू न किया जावे। जो इन वर्गों के जीवन व उनके हितोँ के संवर्धन के विपरित है। उसके बाद पार्टी महामंत्री डॉ एल एस उदय नेे खड़गवा से सटा हुआ बरदर के शिवपुर में आयोजित  दुर्गावती बलिदान दिवस अवसर पर  पहुंचे। तथा  कार्यक्रम दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ उदय ने सर्व प्रथम विरागंना रानी दुर्गावती के चित्र पर पुष्पाजंली अर्पित कर नमन किया। तथा उन्होनें इस अवसर पर अपने आसन्दी से कहा, कि आज हम भले ही अपने इतिहास से मुकर जायें , लेकिन आज विश्व इतिहास गवाह है कि गोंडवाना का एक वैभवशाली साम्राज्य था। जिनका एक स्वर्णिम इतिहास है जिसे कोई मिटा नहीं सकता। गोंडवाना साम्राज्य की 1700 वर्षो की इतिहास के फड़फड़ाते पन्ने को आज देखा जाये। तो उन्होनें कहा सच तो यह है, कि बारहवीं सदी में गोंडवाना एक धूमकेतु जैसे चमक उठा था। तथा राजा शंग्रामशाह के जमाने में देश का एक कोना दब चुका था। जिनके साम्राज्य व्यवस्था में पांच तोले सोने का सिक्का चलता था, आज जिसका साक्षी कलकता का इंडियन म्युजियम है। उन्होनें कहा कि आज गोंडवाना के गौरवशाली इतिहास में सन 1564 की वह कालखंड भी एक अनोखा बीरता की कहानी थी। जिस समय गोंडवाना की रानी दुर्गावती की हुई। जिनका शौर्य और बलिदान आज भी हमारे दिलों में है। जिसको लेकर हम यहां आये हैं। उन्होनें कहा कि भले ही राजा हृदयशाह की आर्धांगिनी जो गोंडवाना की वीरांगनी रानी दुर्गावती जो महोबा की चंदेल वंशज पुत्री थी। पर गोंडवाना साम्राज्य के प्रति उनका बलिदान को हम कभी भूलानहीं सकते । गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ उदय ने अपने वक्तव्य में कहा कि, यह मध्य गोंडवाना प्रक्षेत्र कहलाने का गौरव प्राप्त इलाका है। जो वर्तमान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, विदर्भ महाराष्ट्र, तेंलगना उड़ीसा, उतरप्रदेश जो कालांतर में गोंडवाना साम्राज्य का अहम हिस्सा था। ईश्वी सन 150 में गोंडवाना राज्य के प्रथम राजा धारुशाह मराबी जिनका मंडला से राज्य से प्रारंभ हुआ था। जिस गोंड राजवंश का 1678 तक राज्य चला। यहां तक हृदयशाह मराबी जो गोंड राजवंश का अंतिम शासक था। कुलमिलाकर करीब 17 सौ वर्षो तक एक छत्र गोंड राजवंश का गोंडवाना साम्राज्य जो मध्यभारत में स्थापित था। जिस समय गोंडवाना साम्राज्य के प्रथम राजा धारुशाह थे जिनके तीन भाई थे। जिन्हें राज्य बटवारा में धारुशाह को मंडला, धुरंधरशाह को छत्तीसगढ़ एवं महिपत शाह को देवगढ राज्य मिला था। इतिहास की मानें तो गोंडवाना साम्राज्य में जितने विजयी शंग्रामशाह ने किया। इतनी विजयी यदि अफगान सुल्तान,मुगल बादशाह ने की होती, तो इतिहास के पन्नों में कुछ और होता। उन्होनें कहा –आज अफसोस है कि धीरे-धीरे शिक्षा के अभाव में भोले भाले गोंड जाति समाज के लोग अपने गौरवशाली इतिहास से दूर होते जा रहे हैं। लेकिन आज हमें लिखना पड़ेगा। तथा रानी दुर्गावती जीवन से हमें  प्रेरणा लेना होगा। जिन्होनें अपने खून की बलिदान देकर गोंडवाना के सम्मान को शिखर तक पहुँचाया। नहीं तो आने वाले पीढ़ी इस समाज को माफ नहीं करेगी। इस अवसर पर, शिक्षक सूरजसिंह मरकाम, संबल सिंह मरपच्ची ,विजय कुमार नेताम,अधिवक्ता सूर्यप्रतापसिंह उइके, ज्वालासिंह आयाम,धनसिंह मरपच्ची सहित कई समाज प्रमुखों ने हिस्सा लिया।  कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग आये और गोंडवाना की विरागंना दुर्गावती के चित्र पर अन्नरत्न व फूल अर्पित कर नमन किये तथा उनके बलिदान को याद किये।