बस्तर में नक्सल बामपंथी की समस्या बढ़ी, सरकार सिलगेर कांड की निष्पक्ष जांच हो।

      (संतोष कुमार टोप्पो)

अंबिकापुर/छत्तीसगढ़/GCG NEWS/छत्तीसगढ़ राज्य बने कुल मिलाकर दो दशक हो गया है। सतारुढ़ केंद्रीय सरकार एवं छत्तीसगढ़ राज्य सरकार इतना तो तय है कि तेजी से बस्तर नक्सल बामपन्थी एक गढ़ बन चुका है,जो विषम समस्या है। जो लगातार छत्तीसगढ़ राज्य में पनप रहा है। जिसका समाधान सरकार आज तक नहीं निकाल पाई है । समस्या का मूल कारण है कि बस्तर में आदिवासी समुदाय जहां निवासरत है। वहां खनिज संपदा ,वन संपदा, जलसंपदा से परिपूर्ण है जिसे सरकार बस्तर की संपदा को उद्योगपतियों को बेचना चाहती है। सरकार या उद्योगपति अनुसूचित क्षेत्र में बिना ग्राम सभा प्रस्ताव के जमीन और संपदा नहीं ले सकती है। क्योंकि संविधान में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए पेशा कानून बना हुआ है। जिसे सरकार, प्रशासन, उद्योगपति ,द्वारा फर्जी ग्राम सभा व पुलिस फोर्स (कैंफ ) से आदिवासी समुदाय की जमीनों और संपदा को लूटने की बड़ी साजिश हो रही है। आदिवासी समुदाय अपने जल जंगल जमीन से बेदखल हो जाएंगे। और गैर आदिवासी बस  जाएंगे, आदिवासी इस प्रकार से विस्थापन के कगार पर सरकार पहुंचा रही है। आदिवासी समुदाय की संस्कृति को पूरी दुनिया ने माना है, उनकी संस्कृति को दुनिया अपनाती है तो विश्व में पर्यावरण सुरक्षित रहेगा मानवता जिंदा रहेगी। आदिवासी समुदाय सरकार के ऊपर विश्वास रखती है और सरकार ही उनके खिलाफ कार्य करते हैं जिस प्रकार से 17 मई को सिलगेर बस्तर में घटना हुआ, आदिवासियों को मारा गया।पूर्व में मैंने सिलगेर की घटना को लेकर सरकार को चेतावनी दिया था।अब 14 दिनों बाद छत्तीसगढ़ सरकार की आंख खुली है और सांसद दीपक बैज की अध्यक्षता में 9 सदस्यों की टीम गठित किया हैं। ये वही छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस का एकमात्र सांसद है। जिसने 2019 में एपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा आदिवासीयो के हित में बनाये गए बिल को सांसद में पेश करने में दिलचस्पी नही दिखाई। सरकार आदिवासियों के प्रति गैर जिम्मेदार लोगों को उस कमेटी में रखी है जो खुद आदिवासियों का विकास नही चाहते है। विश्वास है कि कांग्रेस की जो जांच कमेटी बनी है, वो आदिवासियों के हक में बात नही करेगी। अगर ऐसा होता है। उक्त बातें एपी आई के नेता बीपी एस पोया ने कहा है। उन्होनें चेतावनी देते हुए कहा है कि न्याय न्याय न मिलने एपीआई द्वारा सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी।