अनुसूचित जिला कोरबा स्थित पसान तहसील में भू माफियाओं ने राजस्व अमलों की सांठ गांठ से बड़े झाड़ की जंगल को नियम विरुद्ध करा लिया रजिस्ट्री, कार्यवाही को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी करेगी जन आंदोलन।

        (विशेष संवाददाता द्वारा)

कोरबा छत्तीसगढ़, गोंडवाना उदय/GCG NEWS ग्रुप,5 जनवरी 2023, वैसे तो कोरबा संपूर्ण जिला पांचवी अनुसूचित क्षेत्र है, बतौर कानून व्यवस्था पृथक तौर पर जन जाति समुदाय के हितों के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है। लेकिन विडंबना है कि यहां के भोले भाले आदिवासी जनता के बीच बाहर से आकर बसने वाले कुछ जमात अपनी हुकूमत चलाकर इन वर्गों की अधिकार को छीना झपटी में लगे होते हैं। कुल मिला कर आदीवासी  इलाकों में जमीन का मुद्दा सबसे बड़ी गंभीर समस्या है। वैसे तो एक ओर बढ़ती जनसंख्या दूसरी ओर घटती जमीन की रकबा भी विषम सवाल है। लेकिन संवैधानिक तौर पर निहित कानून व्यवस्था की उड़ती धज्जियां आज आदीवासी समुदाय के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसी ही कोरबा जिले के पसान तहसील क्षेत्र में भूमि माफियों द्वारा राजस्व अधिकारियों की सांठ गांठ से भूमि रजिस्ट्री का मामला प्रकाश में आया है।

जिससे भू- माफियाओं ने राजस्व विभाग से सांठगांठ कर वनभूमि के बड़े झाड़ की जमीन पर फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया है। और बकायदा बिक्री के तहत उप पंजीयक कार्यालय कटघोरा में रजिस्ट्री भी कराने का मामला सामने आया है।

इस संबंध पर सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पसान में शासकीय बड़े झाड़ की जमीन, खसरा नंबर 174/थ/2, रकबा 0.0183 हेक्टेयर वन अधिकार अभिलेख में दर्ज शासकीय भूमि है। जो बड़े झाड़ का जंगल है, को भू- माफियाओं ने राजस्व अमलो की सांठगांठ कर फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर 5 जनवरी 2023 को उप पंजीयक कार्यालय कटघोरा से क्रय-विक्रय करा लिया गया है। इस प्रकार राजस्व विभाग व भू- माफियाओं की मिलीभगत से बड़े झाड़ के शासकीय वनभूमि के दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेज, किसान किताब व चौहद्दी को फर्जी तरीके से तैयार कर निजी जमीन बता रजिस्ट्री कराकर इस फर्जीवाडे को अंजाम दिया गया है। सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि हल्का पटवारी व आर आई तथा पंजीयक कार्यालय में बैठे नौकरशाहों ने इस कूटरचना में बराबर की सहभागिता निभाई है। जबकि बड़े झाड़ के जंगल भूमि का न तो रजिस्ट्री, न सीमांकन और न ही बटांकन का नियम है। वन संरक्षण अधिनियम 1080 की धारा 2 के तहत राजस्व दस्तावेज़ों में बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज जमीन का आवंटन को केंद्र शासन की अनुमति के बगैर राज्य शासन के अधिकारी नही कर सकते। हाईकोर्ट ने भी इसमें याचिकाएं खारिज कर दी है, किन्तु यहां पैसों की चकाचौंध के आगे सब मुनासिब हो गया। इसकी प्रशासन स्तर पर निष्पक्ष जांच की जरूरत है। क्योंकि वनभूमि में जमीन के पंजीयक बिक्री का कोई प्रावधान नही है, साथ ही राजस्व विभाग की भूमिका को भी जांच के दायरे में समाहित अत्यंत जरूरी है। क्योंकि यह शासन- प्रशासन के नाक नीचे एक कूटरचित कारनामा है। जिस संबंध संबंधित गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ एल एस उदय सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र जो जनजाति व परम्परा गत मूल निवासियों के हितों की संरक्षण  

हेतु प्रतिबद्ध है। जहां पर माफियायों का राज नहीं चलने देंगे। हमारी पार्टी इस प्रकार से हुई फर्जीवाड़े की तत्काल जांच की मांग करते हुए दोषी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग करती है। यदि इस दिशा कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं होती तो हमारी पार्टी जन आंदोलन के लिए मुखर होगी।