भोपाल मध्यप्रदेश ( गोंडवाना प्रक्षेत्र) GCG NEWS/13नवंबर 2021/ सच तो यह है है कि ईश्वी सन 150 से 1751 तक मध्य भारत में गोंडवाना धूमकेतु सा चमक उठा था। यहां तकराजा शंग्रामशाह के राज शाही व्यवस्था में देश का एक कोना दब चुका था। अलबत्ता 14 वीं शताब्दी की शुरुआत में भोपाल से लेकर चांदागढ़, मिर्जापुर कालाहांडी संबलपुर से भोपाल तक गोंडवाना का लगभग 1800 वर्षो का साम्राज्य व्यवस्था था। जिनके शासन काल में शंग्राम शाह के जमाने में 52 गढ़ 57 परगना के नाम पर राज शाही शासन व्यवस्था कायम था। गोंड योद्धा ने गढ़ा मंडला में अपने मुख्यालय के साथ गोंड साम्राज्य की स्थापना की। गोंड वंश में मदन शाह, गोरखदास, अर्जुनदास और संग्राम शाह जैसे कई शक्तिशाली राजा थे।
राजशाही व्यवस्था के कारण गोंड राजाओ के नाम के बाद शाहया शाही लिखा जाता था। मालवा में मुगल आक्रमण के दौरान भोपाल राज्य के साथ क्षेत्र का एक बड़ा क्षेत्र गोंड साम्राज्य के कब्जे में था। इन प्रदेशों को परगना के नाम पर जाना जाता था जिनमें में से गिन्नौर 750 गांवों में से एक था। भोपाल इसका एक मुख्य हिस्सा था। गोंड राजा निज़ाम शाह इस क्षेत्र का शासन था। चैन शाह के द्वारा जहर खिलाने से निज़ाम शाह की मृत्यु हो गई। उनकी विधवा, कमलावती और पुत्र नवल शाह असहाय हो गए। नवल शाह तब नाबालिग था। निज़ाम शाह की मृत्यु के बाद, रानी कमलावती ने एक मुगल खान के साथ एक समझौता किया, ताकि वे राज्य के मामलों का प्रबंधन कर सकें। मुगल खान एक चतुर और चालाक कट्टर जेहादी अफगानी था। जिसने छोटी रियासतों का अधिग्रहण शुरू किया। रानी कमलावती इन्हें भाई के समान मानती थी ,पर जेहादी परम्परा के अनुसार दोस्त मोहम्मद रानी कमलावती अपनी सामाजिक परम्परा और संस्कृति की रक्षा के लिए कदम कदम पर कार्य की थी। प्रजा की जल सुविधाएँ के लिये छोटे छोटे तालाब में जल संग्रहण करके रखी थी । कुल मिलाकर यह आज हबीब गंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलावती करना गोंड समाज के लिए एक सम्मान का विषय है । रानी कमलावती की मृत्यु के बाद। एक मुगल खान ने गिन्नोर के किले को जब्त कर लिया, विद्रोहियों पर अंकुश लगा दिया, बाकियों पर उनके नियंत्रण के हिसाब से अनुदान दिया। और उनकी कृतज्ञता अर्जित की। छल और कपट से, देवरा राजपूतों को नष्ट कर दिया और उन्हें भी मारकर नदी में बहा दिया; जिसे तब से सलालीटर्स की नदी या हलाली डेम के रूप में जाना जाता है। हबीबगंज स्टेशन का निर्माण अंग्रेजों ने करवाया था. तब इसका नाम रानी कमलावती के शाह वंश के नाम पर शाहपुर था. लेकिन साल 1979 में सरकार ने इस रेलवे इस स्टेशन का विस्तार किया और इसका नाम हबीबगंज रखा. उस समय एमपी नगर का नाम गंज हुआ करता था। दोनों को जोड़कर हबीबगंज रखा गया था. हबीबगंज का नाम भोपाल के नवाब हबीब मियां के नाम पर है। हबीब मियां ने 1979 में स्टेशन के विस्तार के लिए अपनी जमीन दान में दी थी, पर नवाबो के पास जो भी जमीन थी वो गोंडवाना की गोंड राजवंश समाज की रानी कमलावती से ही हड़पी गयी थी।