मामला सरगुजा जिला के डिगमा ग्राम पंचायत का है,जहां पदस्थ सचिव राजलता धुर्वे के विरुद्ध आर्थिक गड़बड़ी का मामला था। शिकायत मिलने पर टीम गठित हुई और जाँच में ग़बन गड़बड़ी प्रमाणिक पाई गई।जिसके बाद बर्ख़ास्तगी की अनुशंसा के साथ ज़िला पंचायत की सामान्य सभा के समक्ष मामला पेश हुआ और ज़िला पंचायत की सामान्य सभा ने बर्ख़ास्तगी की अनुशंसा का अनुमोदन कर दिया।अपने विरुद्ध इस कार्यवाही से क्षुब्ध आदिवासी महिला सचिव ने स्टेट ट्रायबल ट्रिब्युनल का दरवाजा खटखटाया, जहां आयोग के सचिव एचके सिंह उइके की ओर से हुई सुनवाई के बाद कार्यवाही की अनुशंसा की गई।आयोग की ओर से अनुशंसा में लिखा गया है।आवेदिका को जातिगत आधार पर तथा अनावेदक गणों द्वारा ग़लत ढंग से शिकायत करना, ब्लैकमेलिंग करना, जाँच कराने के लिए ज़िम्मेदार मानते हुए आयोग की ओर से स्पष्ट है, कि यह एक गंभीर मामला माना है।
और आईपीसी और एक्ट्रेसिटी के तहत कार्यवाही करने तथा आवेदिका को सेवा में बहाल करने की अनुशंसा की है।
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