तलाक के बाद पत्नी भरण पोषण नहीं ले सकती। निचले अदालत के फैसले के बिरुद्ध अधिवक्ता रामसेवक सोनी के याचिका पर हाई कोर्ट ने दिया फैसला

         ( विशेष संवाददाता द्वारा)

बिलासपुर/छत्तीसगढ़/GCG NEWS/ 26 अप्रैल 2021, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा   एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया, कि तलाक के बाद पत्नी भरण पोषण नहीं ले सकती है। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा व जस्टिस एनके चंद्रवंशी की युगलपीठ में हुई।
राहुल तिवारी ने अधिवक्ता रामसेवक सोनी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। इसमें उन्होंने बताया कि उनकी शादी वंदना तिवारी के साथ हुई थी। शादी के दोनों का दांपत्य जीवन मात्र एक माह का रहा। बाद में पत्नी स्वेच्छा से अलग होकर अपने मायके मनेंद्रगढ़ आ गई। वहीं रहते हुए उसने दंड प्रक्रिया सहिंता की धारा 125 के तहत भरण पोषण के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत की जो 2017 में खारिज हो गई। क्योंकि वे स्वेच्छा से अलग रह रही थी। इस पर उन्होंने तलाक के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दी। तलाक का मामला चलने के दौरान ही उन्होंने हिंदू दत्तक भरण पोषण अधिनियम की धारा 18 के तहत विवाहित महिला को भरण पोषण दिलाए जाने की मांग की। उसी न्यायालय में प्रस्तुत की जहां से पहले उनका धारा 125 का आवेदन निरस्त हुआ था। इसी बीच पत्नी की ओर से प्रस्तुत तलाक के प्रकरण में दोनों पति पत्नी के बीच तलाक की डिक्री भी पारित हो गई के 1 माह बाद हिन्दू दत्तक भरण पोषण अधिनियम की धारा 18 के तहत पत्नी का आवेदन स्वीकार करते हुए 3000/- रुपये प्रतिमाह का आदेश याचिकाकर्ता के विरुद्ध 15 मई 2019 को पत्नी के पक्ष में फैसला दे दिया। याचिकाकर्ता ने मा0 उच्च न्यायालय बिलासपुर छ0ग0 के समक्ष उक्त आदेश की अपील प्रस्तुत कर मामले में चुनौती दी, जिसमे सुनवाई के दौरान मा0 सुप्रीम कोर्ट के चंद्रभवन मामले को न्याय दृष्टांत को अहम बताते अपना अंतिम आदेश पारित किया और उक्त मामले में , मामले की पोषण्यता के आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर याचिकाकर्ता की अपील को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा कि महिला तलाकशुदा है दोनो के मध्य तलाक भी हो चुका है इस कारण गुणदोष के आधार पर याचिकाकर्ता की अपील स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि एक तलाकशुदा पत्नी हिंदू विवाह दत्तक भरण पोषण अधिनियम की धारा 18 के तहत भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है।